बैल और गधा – अलिफ़ लैला की कहानी

बैल और गधा – अलिफ़ लैला की कहानी

बहुत समय पहले एक अमीर सौदागर रहता था। उसके पास बहुत जमीन, जानवर और नौकर थे। वह अपने खेतों में खेती भी करता था। उसकी पत्नी और बच्चे भी थे और उसका परिवार खुशहाल था।

उस सौदागर के पास एक खास शक्ति थी — वह जानवरों और पक्षियों की भाषा समझ सकता था। लेकिन इस शक्ति की एक शर्त थी। अगर वह यह बात किसी को बता देता, तो उसकी मौत हो जाती। इसलिए उसने यह राज हमेशा छिपाकर रखा।

बैल और गधे की बात

एक दिन सौदागर अपने आंगन में बैठा था। उसके पास उसका बैल और गधा बंधे हुए थे। तभी उसने बैल को गधे से बात करते सुना।

बैल दुखी होकर बोला —
“तुम बहुत आराम से रहते हो। तुम्हें साफ जगह मिलती है, अच्छा खाना मिलता है और ज्यादा काम भी नहीं करना पड़ता।

लेकिन मुझे सुबह से शाम तक खेत में काम करना पड़ता है। मुझे भारी हल खींचना पड़ता है। मुझे थकान होती है और खाना भी अच्छा नहीं मिलता।”

गधा बोला —
“भाई, तुम बहुत सीधे हो। तुम ज्यादा मेहनत करते हो इसलिए लोग तुमसे और काम लेते हैं। अगर तुम मेरी बात मानो तो तुम भी आराम कर सकते हो।”

बैल बोला — “कैसे?”

गधा बोला —
“जब तुम्हें खेत ले जाएं, तो जमीन पर लेट जाना। खाना दें तो मत खाना। ऐसा कुछ दिन करोगे तो लोग समझेंगे कि तुम बीमार हो और तुम्हें आराम मिलेगा।”

बैल को यह सलाह अच्छी लगी और उसने ऐसा करने का फैसला कर लिया।

गधे की मुसीबत

अगले दिन बैल खेत में जाकर लेट गया। उसने काम नहीं किया और खाना भी नहीं खाया। किसान को लगा बैल बीमार हो गया है।

किसान ने यह बात सौदागर को बताई। लेकिन सौदागर समझ गया कि बैल ऐसा क्यों कर रहा है, क्योंकि उसने उनकी बात सुनी थी।

सौदागर बोला —
“आज बैल की जगह गधे से काम करवाओ।”

उस दिन गधे को खेत में काम करना पड़ा। वह बहुत थक गया। शाम तक उसकी हालत खराब हो गई।

उधर बैल आराम करता रहा।

गधे को पछतावा हुआ

रात को बैल ने गधे को धन्यवाद कहा।
लेकिन गधा दुखी था। उसे अपनी गलती समझ आ गई थी।

गधे ने बैल से कहा —
“कल से तुम ठीक से काम करना। मैंने सुना है अगर तुम काम नहीं करोगे तो तुम्हें कसाई को बेच दिया जाएगा।”

यह सुनकर बैल डर गया और अगले दिन से ठीक से काम करने लगा।

सौदागर और उसकी पत्नी

अगले दिन सौदागर बैल को देखकर हँसने लगा। उसकी पत्नी ने पूछा —
“आप क्यों हँस रहे हैं?”

सौदागर बोला —
“मैं कारण नहीं बता सकता। अगर बताया तो मैं मर जाऊँगा।”

लेकिन उसकी पत्नी जिद करने लगी। वह बार-बार पूछने लगी।

सौदागर बहुत परेशान हो गया।

मुर्गा और कुत्ते की बात

एक दिन सौदागर जानवरों के पास गया। वहाँ उसने एक कुत्ते और मुर्गे की बात सुनी।

कुत्ता बोला —
“हमारा मालिक मुसीबत में है और तुम मजे कर रहे हो?”

मुर्गा बोला —
“अगर मालिक अपनी पत्नी को समझा नहीं पा रहा, तो उसे सख्ती से समझाना चाहिए।”

यह सुनकर सौदागर को समझ आया कि उसे अपनी पत्नी को समझाना होगा।

आखिर में क्या हुआ

सौदागर ने अपनी पत्नी को सख्ती से समझाया कि कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें जानना जरूरी नहीं होता। उसने उसे समझाया कि जिद करने से परिवार टूट सकता है।

पत्नी को अपनी गलती समझ आ गई। उसने वादा किया कि वह बेकार की जिद नहीं करेगी।

इसके बाद दोनों खुशी-खुशी रहने लगे।

कहानी से सीख

  • बिना सोचे समझे सलाह नहीं देनी चाहिए।
  • हर बात जानना जरूरी नहीं होता।
  • समझदारी और धैर्य से परिवार चलता है।
  • लालच या चालाकी कभी-कभी उल्टा पड़ सकती है।

मुख्य पेज – अलिफ लैला कहानियाँ

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top