बहुत समय पहले एक जंगल के पास एक घर में एक लोमड़ी और एक भेड़िया साथ रहते थे।
भेड़िया बहुत क्रूर और गुस्से वाला था। वह दूसरों को परेशान करता था।
वहीं लोमड़ी शांत स्वभाव की थी और समझदारी से काम लेती थी।
एक दिन लोमड़ी ने भेड़िये से कहा —
“अगर तुम ऐसे ही दूसरों पर जुल्म करते रहे, तो एक दिन इंसान तुम पर राज करेगा। इंसान बहुत चालाक होता है। वह पहाड़ तोड़ सकता है, मछली पकड़ सकता है, पक्षियों को पकड़ सकता है।”
भेड़िया गुस्सा हो गया।
वह बोला — “तुम मुझे सीख देने वाले कौन होते हो? आगे से मुझे सलाह मत देना।”
लोमड़ी चुप हो गई, लेकिन उसने मन में सोच लिया कि एक दिन वह भेड़िये से बदला लेगी।
चालाक लोमड़ी की योजना
एक दिन लोमड़ी घूमते-घूमते एक बाग में गई। वहाँ उसे एक गहरा गड्ढा दिखा जो जाल की तरह बनाया गया था। वह समझ गई कि यह जंगली जानवर पकड़ने के लिए बनाया गया है।
लोमड़ी ने सोचा —
“काश भेड़िया इस गड्ढे में गिर जाए।”
वह तुरंत घर वापस गई और भेड़िये से बोली —
“मुझे एक बाग मिला है जहाँ बहुत स्वादिष्ट फल लगे हैं। मालिक मर गया है। अब वहाँ कोई नहीं है।”
भेड़िये को लालच आ गया।
वह तुरंत लोमड़ी के साथ चल पड़ा।
भेड़िया गड्ढे में गिर गया
जब वे बाग में पहुंचे तो लोमड़ी ने कहा —
“यहाँ से अंदर जाओ, दीवार टूटी हुई है।”
जैसे ही भेड़िया आगे बढ़ा, वह गड्ढे में गिर गया।
लोमड़ी बहुत खुश हुई। वह नाचने लगी।
फिर उसने गड्ढे में झाँक कर कहा —
“अब समझ आया दूसरों को परेशान करने का नतीजा क्या होता है?”
भेड़िया डर गया।
वह बोला —
“मुझे बाहर निकाल दो। मैं बदल जाऊँगा।”
लेकिन लोमड़ी ने उसकी बात नहीं मानी।
भेड़िये की चालाकी
कुछ देर बाद भेड़िया रोने लगा और बोला —
“अगर मैं बच गया तो मैं अच्छे काम करूँगा। गरीबों की मदद करूँगा।”
लोमड़ी को थोड़ी दया आ गई।
उसने अपनी पूँछ नीचे लटका दी ताकि भेड़िया पकड़ कर ऊपर आ सके।
लेकिन भेड़िये ने पूँछ खींच ली और लोमड़ी भी गड्ढे में गिर गई।
अब भेड़िया बोला —
“अब हम दोनों साथ मरेंगे।”
लोमड़ी डर गई, लेकिन उसने दिमाग लगाया।
लोमड़ी की आखिरी चाल
लोमड़ी बोली —
“अगर हम बाहर निकलना चाहते हैं तो एक तरीका है। तुम सीधे खड़े हो जाओ। मैं तुम्हारे ऊपर चढ़कर बाहर निकल जाऊँगी। फिर मैं तुम्हें बाहर निकाल दूँगी।”
भेड़िये के पास कोई और रास्ता नहीं था।
वह मान गया।
लोमड़ी उसके कंधे पर चढ़ी और बाहर कूद गई।
कहानी का अंत
भेड़िया चिल्लाया —
“मुझे बाहर निकालो!”
लोमड़ी बोली —
“तुमने मुझे धोखा दिया था। अब मैं क्यों मदद करूँ?”
फिर लोमड़ी ने बाग के रखवालों को बुला लिया।
रखवालों ने आकर भेड़िये को मार दिया।
लोमड़ी वहाँ से भाग गई और बाद में आराम से रहने लगी।
कहानी से सीख
- लालच इंसान को मुसीबत में डाल देता है।
- जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, खुद उसमें गिरता है।
- बुरे काम का नतीजा हमेशा बुरा होता है।
- मुश्किल समय में दिमाग से काम लेना चाहिए।
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