एक समय की बात है। एक साही खजूर के पेड़ के नीचे आकर रहने लगा। उसी पेड़ पर एक कबूतर अपनी पत्नी के साथ रहता था। दोनों कबूतर आराम से पेड़ के फल खाते और खुश रहते थे। साही नीचे रहता था और ऊपर लगे खजूर के फल देखकर उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि अगर कोई चाल चल ली जाए तो उसे भी इन फलों का मज़ा मिल सकता है।
साही ने पेड़ के पास एक गड्ढा खोद लिया और वहीं अपनी पत्नी के साथ रहने लगा। फिर उसने लोगों को दिखाने के लिए पूजा-पाठ जैसा नाटक करना शुरू कर दिया। वह रोज़ एक जगह बैठकर ऐसे प्रार्थना करता जैसे बहुत बड़ा भक्त हो। एक दिन नर कबूतर ने उसे देखा और उसे लगा कि साही बहुत अच्छा और धार्मिक जानवर है। उसके मन में साही के लिए दया और सम्मान आ गया।
कबूतर ने साही से पूछा, “तुम कब से ऐसा कर रहे हो?”
साही बोला, “करीब तीस साल से।”
कबूतर ने फिर पूछा, “तुम खाते क्या हो?”
साही बोला, “जो खजूर खुद गिर जाते हैं, वही खा लेता हूँ।”
कबूतर ने पूछा, “तुम पहनते क्या हो?”
साही हँसकर बोला, “मेरे काँटे ही मेरे कपड़े हैं।”
धीरे-धीरे कबूतर साही की बातों में आ गया। साही ने उसे समझाया कि ज्यादा खाने और जमा करने से अच्छा है कि कम में संतोष करना चाहिए और भविष्य के लिए सोचना चाहिए। फिर उसने कबूतर को एक चालाक सलाह दी। उसने कहा कि अगर तुम पेड़ को हिलाओगे तो बहुत सारे खजूर नीचे गिर जाएंगे। तुम और तुम्हारी पत्नी आराम से खा पाओगे और कुछ बाद के लिए जमा भी कर सकते हो।
कबूतर को यह बात अच्छी लगी। वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर पेड़ को हिलाने लगा। ऊपर से खजूर गिरने लगे। लेकिन जैसे ही खजूर नीचे गिरे, साही चुपके-चुपके उन्हें उठाकर अपने गड्ढे में जमा करने लगा। कबूतर और उसकी पत्नी ऊपर मेहनत करते रहे और साही नीचे सारे फल अपने घर में भरता रहा।
जब कबूतर नीचे आया तो उसने देखा कि एक भी खजूर जमीन पर नहीं है। वह परेशान होकर साही से बोला, “यहाँ तो एक भी फल नहीं बचा। अब हम क्या खाएंगे?”
साही बोला, “शायद हवा उड़ा कर ले गई होगी। अब तुम खाने की चिंता छोड़ो और भगवान का नाम लो।”
साही लगातार मीठी-मीठी बातें करता रहा ताकि कबूतर को शक न हो। लेकिन कबूतर को धीरे-धीरे समझ आ गया कि साही ने उसे धोखा दिया है। तब कबूतर ने साही को समझाने के लिए एक कहानी सुनाई।
कबूतर बोला कि एक शहर में एक बहुत अमीर सौदागर रहता था। एक बार वह अपने ऊँटों पर सामान लादकर व्यापार करने निकला। दो धोखेबाज़ लोग उसे लूटने के इरादे से उसके पीछे चल दिए। लेकिन दोनों के मन में लालच इतना ज्यादा था कि वे एक-दूसरे को भी धोखा देना चाहते थे।
एक ने खाने में ज़हर मिलाया और अपने साथी को देने चला। दूसरे ने भी वही किया। दोनों ने एक-दूसरे का ज़हरीला खाना खा लिया और थोड़ी देर बाद मर गए। इस तरह वे अपने ही जाल में फँस गए।
कहानी खत्म करके कबूतर बोला, “जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद भी उसमें गिर सकता है।”
यह सुनकर साही चुप हो गया। उसे अपनी चालाकी और लालच पर शर्म आने लगी। कबूतर और उसकी पत्नी वहां से उड़ गए और दूसरी जगह जाकर रहने लगे। साही अकेला रह गया।
इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि लालच और धोखा ज्यादा समय तक नहीं चलते। जो दूसरों को नुकसान पहुंचाता है, उसे कभी न कभी उसका फल जरूर मिलता है। सच्चाई और ईमानदारी से जीने वाला इंसान ही असली सुख पाता है।
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