बतख और कछुए की कहानी : अलिफ़ लैला (Batakh Aur Kachhue Ki Kahani)

बतख और कछुए की कहानी : अलिफ़ लैला (Batakh Aur Kachhue Ki Kahani)

बहुत समय पहले की बात है। एक बतख आसमान में बहुत ऊँचा उड़ रहा था। उड़ते-उड़ते वह एक बहती हुई नदी के बीच में खड़ी एक बड़ी चट्टान पर जाकर बैठ गया। वह आराम से बैठा ही था कि पानी की तेज लहर बहकर आई और अपने साथ एक आदमी का मरा हुआ शरीर उसके पास छोड़ गई।

बतख ने ध्यान से देखा तो उसे उस शरीर पर भाले और तलवार के निशान दिखाई दिए। उसने मन ही मन सोचा कि शायद यह आदमी कोई बुरा काम करने वाला रहा होगा, तभी लोगों ने इसे मार दिया होगा।

वह यह सब सोच ही रहा था कि तभी ऊपर से एक गिद्ध और कुछ बड़ी चिड़ियाँ वहाँ आ गईं। उन्हें देखकर बतख डर गया। उसे लगा कि अब यहाँ रुकना ठीक नहीं है। इसलिए वह वहाँ से उड़ गया और ऐसी जगह जाकर बैठा जहाँ से वह सब कुछ देख भी सके और खुद सुरक्षित भी रहे।

इस बार वह नदी के बीच उगे एक पेड़ पर जाकर बैठ गया। लेकिन वह बहुत दुखी था क्योंकि उसे अपनी जन्म वाली जगह छोड़नी पड़ी थी। वह सोच रहा था कि उसका बुरा समय उसका पीछा नहीं छोड़ रहा।

तभी वहाँ एक नर कछुआ तैरता हुआ आया। उसने बतख को सलाम किया और प्यार से पूछा कि वह इतनी दूर यहाँ कैसे आ गया।

बतख ने कहा कि उसकी जगह पर दुश्मन आ गए थे और समझदार लोग कहते हैं कि जहाँ दुश्मन हों वहाँ नहीं रहना चाहिए।

कछुए को बतख की बात सुनकर उस पर दया आ गई। उसने कहा कि वह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। वह हमेशा उसके साथ रहेगा और उसकी मदद करेगा। उसने कहा कि दुखी रहने से जिंदगी खराब हो जाती है।

दोनों साथ रहने लगे। कछुआ बतख को हिम्मत देता रहता था। धीरे-धीरे बतख को अच्छा लगने लगा और उसे भरोसा हो गया कि अब वह सुरक्षित है।

कुछ समय बाद बतख अपनी पुरानी जगह देखने गया। वहाँ जाकर उसने देखा कि वे बड़ी चिड़ियाँ अब वहाँ नहीं थीं। उन्होंने उस आदमी के शरीर को खा लिया था और अब वहाँ सिर्फ हड्डियाँ बची थीं।

बतख खुश हो गया और वापस कछुए के पास गया। उसने बताया कि अब खतरा खत्म हो गया है और वह अपने घर वापस जाना चाहता है।

दोनों साथ-साथ बतख के घर गए। वहाँ सब कुछ सुरक्षित था। इसके बाद दोनों खुशी-खुशी उसी टापू पर रहने लगे।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन अचानक एक भूखी चील वहाँ आ गई। उसने बतख पर हमला किया और उसे मार डाला।

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि जिंदगी में सिर्फ तारीफ या अच्छी बातें काफी नहीं होतीं। हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि खतरा कभी भी आ सकता है।

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