शहरयार और शाहजमाँ की कहानी – अलिफ़ लैला (Shaharyar Aur Shahjaman Ki Kahani)

शहरयार और शाहजमाँ की कहानी – अलिफ़ लैला (Shaharyar Aur Shahjaman Ki Kahani)

बहुत समय पहले फारस देश में एक बहुत शक्तिशाली और न्यायप्रिय बादशाह राज करता था। उसकी प्रजा उससे बहुत खुश रहती थी क्योंकि वह सही फैसला लेने वाला और दयालु राजा था। उस बादशाह के दो बेटे थे – बड़े बेटे का नाम शहरयार और छोटे बेटे का नाम शाहजमाँ था।

दोनों राजकुमार बहादुर, समझदार और अच्छे स्वभाव वाले थे। जब उनके पिता की मृत्यु हो गई तो बड़ा बेटा शहरयार फारस का बादशाह बन गया। उसने अपने छोटे भाई शाहजमाँ को तातार देश का राजा बना दिया। शाहजमाँ अपने भाई का बहुत सम्मान करता था और उसने समरकंद शहर को अपनी राजधानी बना लिया।

दस साल बाद भाइयों की मुलाकात

लगभग दस साल बाद शहरयार को अपने छोटे भाई की याद आई। उसने अपने मंत्री को शाहजमाँ को बुलाने भेजा। शाहजमाँ बहुत खुश हुआ और उसने कहा कि वह कुछ दिनों में राज्य का काम संभालने के लिए एक मंत्री नियुक्त करके भाई के पास आ जाएगा।

यात्रा की तैयारी के बाद एक रात शाहजमाँ को अपनी रानी से मिलने का मन हुआ। वह चुपके से महल पहुँचा। लेकिन वहाँ जो उसने देखा, उससे उसकी जिंदगी बदल गई।

उसने अपनी रानी को एक नौकर के साथ गलत हालत में देखा। यह देखकर शाहजमाँ को बहुत गुस्सा आया और दुख भी हुआ। गुस्से में उसने दोनों को मार दिया और बिना किसी को बताए वापस अपने शिविर में आ गया।

दुख से भरा सफर

इसके बाद शाहजमाँ अपने भाई के पास जाने के लिए निकल गया, लेकिन उसका मन बहुत दुखी था। रास्ते भर वह उदास रहा। जब वह शहरयार के पास पहुँचा तो दोनों भाई बहुत प्यार से मिले।

शहरयार ने देखा कि शाहजमाँ हमेशा दुखी रहता है। उसने उसका मन बहलाने के लिए कई तरह के मनोरंजन करवाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

दूसरा बड़ा सच सामने आया

एक दिन शहरयार शिकार खेलने चला गया। शाहजमाँ महल में ही रुक गया। तभी उसने देखा कि शहरयार की रानी कई लोगों के साथ बाग में आई और गलत काम करने लगी।

यह देखकर शाहजमाँ को लगा कि वह अकेला दुखी नहीं है। उसने सोचा कि दुनिया में ऐसे काम होते रहते हैं। इसके बाद उसका दुख थोड़ा कम हो गया।

जब शहरयार शिकार से वापस आया तो उसने देखा कि शाहजमाँ अब खुश रहने लगा है। उसने कारण पूछा तो शाहजमाँ ने सब सच बता दिया।

दोनों भाइयों का दुनिया घूमने का फैसला

यह सुनकर शहरयार को बहुत बड़ा झटका लगा। उसने तय किया कि वह दुनिया घूमेगा और देखेगा कि क्या कोई उनसे ज्यादा दुखी है।

दोनों भाई निकल पड़े। रास्ते में उन्होंने एक भयानक दैत्य और एक औरत की अजीब कहानी देखी। उस औरत ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बाद भी वह अपनी मर्जी करती है।

यह देखकर दोनों भाइयों का विश्वास टूट गया। शहरयार ने तय कर लिया कि वह किसी भी औरत पर भरोसा नहीं करेगा।

शहरयार का क्रूर फैसला

राजधानी लौटकर शहरयार ने अपनी रानी को मरवा दिया। इसके बाद उसने बहुत कठोर फैसला लिया। उसने सोचा कि वह हर दिन नई लड़की से शादी करेगा और अगले दिन उसे मरवा देगा, ताकि कोई उसे धोखा न दे सके।

धीरे-धीरे पूरे शहर में डर फैल गया। लोग अपनी बेटियों को छिपाने लगे या दूसरे शहरों में भेजने लगे।

शहरजाद की एंट्री – कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़

मंत्री की दो बेटियाँ थीं –

  • बड़ी बेटी – शहरजाद
  • छोटी बेटी – दुनियाजाद

शहरजाद बहुत समझदार और पढ़ी-लिखी लड़की थी। उसने अपने पिता से कहा कि वह बादशाह से शादी करना चाहती है ताकि इस अत्याचार को रोक सके।

उसके पिता डर गए, लेकिन शहरजाद अपनी बात पर अड़ी रही। उसने कहा कि अगर वह मर भी गई तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर वह बादशाह को बदल पाई तो हजारों लड़कियों की जान बच जाएगी।

यहीं से अलिफ़ लैला की मशहूर कहानी आगे शुरू होती है, जहाँ शहरजाद हर रात बादशाह को कहानी सुनाकर अपनी और बाकी लड़कियों की जान बचाने की कोशिश करती है।

कहानी से सीख

  • गुस्से में लिया गया फैसला हमेशा सही नहीं होता
  • हर इंसान एक जैसा नहीं होता
  • समझदारी और धैर्य से बड़ी समस्या भी हल हो सकती है
  • ज्ञान और कहानी की ताकत बहुत बड़ी होती है

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