बहुत पुराने समय की बात है। एक बहुत अमीर व्यापारी था। उसका व्यापार कई शहरों और देशों तक फैला हुआ था। हर जगह उसके गोदाम, नौकर और काम देखने वाले लोग थे। लेकिन फिर भी वह खुद भी व्यापार के काम से सफर करता रहता था।
एक बार उसे जरूरी काम से दूर शहर जाना पड़ा। वह अकेला घोड़े पर बैठकर निकल पड़ा। रास्ता लंबा था, इसलिए उसने अपने साथ खाने के लिए कुलचे और खजूर रख लिए।
काम पूरा करके जब वह वापस लौट रहा था, तो चौथे दिन सुबह उसे रास्ते से थोड़ी दूर पेड़ों के बीच एक सुंदर तालाब दिखा। उसने सोचा थोड़ा आराम कर लिया जाए। वह घोड़े से उतरा, तालाब के किनारे बैठा और खाना खाने लगा।
खाना खत्म करने के बाद उसने खजूर की गुठलियाँ इधर-उधर फेंक दीं और आराम करने लगा।
दैत्य का आगमन
अचानक उसके सामने एक बहुत बड़ा और डरावना दैत्य आ गया। उसके हाथ में बड़ी तलवार थी। वह गुस्से में चिल्लाया —
“उठ! मैं तुझे मार डालूँगा।”
व्यापारी डर से काँपने लगा। उसने कहा —
“स्वामी, मैंने क्या गलती की है?”
दैत्य बोला —
“तूने मेरे बेटे को मार दिया है।”
व्यापारी हैरान रह गया। उसने कहा —
“मैंने तो आपके बेटे को देखा भी नहीं।”
दैत्य बोला —
“जब तू खजूर खाकर गुठलियाँ फेंक रहा था, एक गुठली मेरे बेटे की आँख में लगी और वह मर गया।”
व्यापारी की विनती
व्यापारी रोने लगा और बोला —
“मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। मुझसे गलती हो गई। मुझे माफ कर दीजिए।”
लेकिन दैत्य बोला —
“मैं दया नहीं करता। जान के बदले जान।”
दैत्य उसे मारने ही वाला था कि व्यापारी ने आखिरी इच्छा रखी।
एक साल की मोहलत
व्यापारी बोला —
“मुझे एक साल का समय दे दो। मैं घर जाकर अपने परिवार से मिल लूँ, कर्ज चुका दूँ और अपनी संपत्ति बाँट दूँ। फिर मैं खुद वापस आ जाऊँगा।”
दैत्य ने सोचा और बोला —
“ठीक है, लेकिन कसम खाकर वादा करो।”
व्यापारी ने भगवान की कसम खाई। दैत्य गायब हो गया और व्यापारी घर लौट गया।
घर में दुख का माहौल
घर पहुँचकर सब उसे देखकर खुश हुए, लेकिन वह रोने लगा। उसने सबको पूरी बात बताई।
पूरा परिवार रोने लगा।
इसके बाद व्यापारी ने धीरे-धीरे अपने सारे काम पूरे किए —
- कर्ज चुकाए
- गरीबों को दान दिया
- नौकरों को आजाद किया
- बच्चों में संपत्ति बाँटी
एक साल कब बीत गया, उसे पता ही नहीं चला।
वादा निभाने का समय
एक साल पूरा होने पर वह दुखी मन से वापस उसी तालाब पर गया।
वहाँ बैठकर वह दैत्य का इंतजार करने लगा।
तीन बूढ़ों से मुलाकात
वहाँ एक बूढ़ा आदमी हिरनी के साथ आया। व्यापारी ने उसे पूरी कहानी बताई। बूढ़ा उसकी सच्चाई से बहुत प्रभावित हुआ और वहीं रुक गया।
कुछ देर बाद दूसरा बूढ़ा दो काले कुत्तों के साथ आया। फिर तीसरा बूढ़ा खच्चर के साथ आया। तीनों व्यापारी की सच्चाई देखकर उसके साथ बैठ गए।
दैत्य फिर आया
अचानक धुएँ का बड़ा गुबार उठा और दैत्य प्रकट हो गया। उसने व्यापारी को पकड़ लिया।
तभी हिरनी वाला बूढ़ा बोला —
“हे दैत्य, मैं अपनी और इस हिरनी की कहानी सुनाना चाहता हूँ। अगर आपको कहानी अच्छी लगे, तो व्यापारी की सजा का एक हिस्सा माफ कर दीजिए।”
दैत्य ने सोचा और कहा —
“ठीक है, कहानी सुनाओ।”
यहीं से शुरू होती है आगे की रोमांचक कहानी…
कहानी से सीख
- गलती छोटी हो लेकिन असर बड़ा हो सकता है
- वादा निभाना बहुत बड़ी बात होती है
- सच्चाई और ईमानदारी इंसान की सबसे बड़ी ताकत है
- मुश्किल समय में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए
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