सलाहुद्दीन अय्यूबी का जीवन परिचय

सलाहुद्दीन अय्यूबी का जीवन परिचय

सलाहुद्दीन अय्यूबी इस्लामी इतिहास के सबसे महान योद्धाओं और शासकों में से एक थे। उन्हें दुनिया में सलादीन (Saladin) के नाम से भी जाना जाता था। उनका पूरा नाम सalah-अल-दीन यूसुफ बिन अय्यूब था। उनका जन्म लगभग 1137 ईस्वी में तिकरित (इराक) में हुआ था। वह एक कुर्द मुस्लिम परिवार से थे।

अय्यूबी बचपन से ही समझदार, शांत स्वभाव के और मेहनती थे। उन्हें पढ़ाई और धार्मिक ज्ञान में भी बहुत रुचि थी। कहा जाता है कि उन्होंने कम उम्र में ही कुरआन शरीफ याद कर लिया था। आगे चलकर उन्होंने तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्ध की रणनीतियाँ भी सीखीं।

सलाहुद्दीन अय्यूबी का सत्ता तक पहुंचने का सफर

सलाहुद्दीन ने अपने करियर की शुरुआत सैनिक के रूप में की थी। वे शुरू में नूरुद्दीन जंगी के अधीन काम करते थे। धीरे-धीरे अपनी बहादुरी और समझदारी से उन्होंने खास पहचान बना ली थी।

1169 में उन्हें मिस्र में वज़ीर बनाया गया था। उस समय मिस्र में फातिमी शासन था। बाद में उन्होंने फातिमी शासन खत्म कर दिया था और सुन्नी शासन स्थापित किया था। इसके बाद उन्होंने मिस्र और सीरिया को एकजुट किया था और एक मजबूत साम्राज्य की नींव रखी थी।

सलाहुद्दीन अय्यूबी के द्वारा अय्यूबी सल्तनत की स्थापना

सलाहुद्दीन अय्यूबी ने अय्यूबी सल्तनत की स्थापना की थी। इस सल्तनत का राज मिस्र, सीरिया, यमन, हिजाज और आसपास के कई इलाकों तक फैला हुआ था।

उन्होंने अपने शासन में प्रशासन को मजबूत बनाया था। वे जनता के कामों को जल्दी सुनते थे और फैसले न्याय से लेते थे।

सलाहुद्दीन अय्यूबी के द्वारा धर्मयुद्ध और यरूशलेम की फतह

सलाहुद्दीन अय्यूबी का सबसे बड़ा नाम धर्मयुद्ध (Crusades) में हुआ था।
1187 ईस्वी में उन्होंने हत्तीन की लड़ाई में क्रूसेडर सेना को हराया था। इसके बाद उन्होंने यरूशलेम (बैतुल मुकद्दस) को जीत लिया था।

यरूशलेम जीतने के बाद उन्होंने बदले की भावना नहीं रखी थी। उन्होंने ईसाइयों और यहूदियों को सुरक्षित जाने की अनुमति दी थी। इसी वजह से दुश्मन भी उनकी इज्जत करते थे।

सलाहुद्दीन अय्यूबी के द्वारा यरूशलेम की फतह
सलाहुद्दीन अय्यूबी के द्वारा यरूशलेम की फतह

सलाहुद्दीन अय्यूबी का तीसरा धर्मयुद्ध और रिचर्ड लायनहार्ट

तीसरे धर्मयुद्ध में उनका सामना इंग्लैंड के राजा रिचर्ड प्रथम से हुआ था। दोनों के बीच कई लड़ाइयाँ हुई थीं। अंत में उन्होंने समझौता किया था, जिससे यरूशलेम मुस्लिम नियंत्रण में ही रहा था।

सलाहुद्दीन अय्यूबी ने किये जनता के लिए काम

सलाहुद्दीन केवल योद्धा ही नहीं बल्कि जनता का ख्याल रखने वाले शासक भी थे।

  • उन्होंने अस्पताल बनवाए थे।
  • स्कूल और मदरसे बनवाए थे।
  • गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते थे।

उनके समय में मिस्र और सीरिया में चिकित्सा और शिक्षा का अच्छा विकास हुआ था।

सलाहुद्दीन अय्यूबी की सादगी भरी जिंदगी

इतनी बड़ी सल्तनत के मालिक होने के बावजूद वे बहुत सादा जीवन जीते थे।
कहा जाता है कि उन्होंने कभी शाही शानो-शौकत को महत्व नहीं दिया था।
वे अक्सर साधारण कपड़े पहनते थे और जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल नहीं करते थे।

सलाहुद्दीन का न्यायप्रिय शासक

अय्यूबी को इतिहास का सबसे न्यायप्रिय शासक माना जाता था।
उनके दरबार में हर धर्म और हर जाति के लोग अपने फैसले के लिए आते थे।
वे हर इंसान को बराबर मानते थे।

सलाहुद्दीन की युद्ध कौशल

उन्होंने अपने जीवन में बहुत सारी लड़ाइयाँ लड़ी थीं।
उनकी सेना अनुशासन और रणनीति के लिए जानी जाती थी।
उन्होंने कई बार कम सैनिकों के साथ बड़ी सेना को हराया था।

सलाहुद्दीन अय्यूबी का अंतिम जीवन

सलाहुद्दीन ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा युद्ध और शासन में बिताया था।
उनकी मृत्यु 1193 ईस्वी में हुई थी।

कहा जाता है कि उनकी मृत्यु के समय उनके पास ज्यादा धन नहीं था क्योंकि वे अपना धन गरीबों और जरूरतमंदों पर खर्च कर देते थे।

सलाहुद्दीन की विरासत

सलाहुद्दीन अय्यूबी को इतिहास में एक

  • बहादुर योद्धा
  • न्यायप्रिय शासक
  • दयालु इंसान
    के रूप में याद किया जाता रहा है।

आज भी दुनिया भर में उन्हें सम्मान से याद किया जाता है।

सलाहुद्दीन अय्यूबी के जीवन में कुछ महत्वूर्ण तथ्य

  • उन्होंने हत्तीन की लड़ाई जीतने के बाद यरूशलेम पर कब्जा किया था। यह उनकी सबसे बड़ी जीत मानी जाती थी।
  • क्रूसेडर सेना बहुत बड़ी थी, लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति और समझदारी से उसे हराया था।
  • यरूशलेम जीतने के बाद उन्होंने ईसाइयों और यहूदियों को सुरक्षित जाने दिया था। उस समय यह बहुत बड़ी इंसानियत की मिसाल मानी गई थी।
  • इतनी बड़ी सल्तनत के मालिक होने के बावजूद वे साधारण कपड़े पहनते थे और शाही ऐशो-आराम से दूर रहते थे।
  • कहा जाता है कि उन्होंने अपना ज्यादातर धन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद में खर्च किया था।
  • उनकी ईमानदारी और इंसाफ की वजह से दुश्मन भी उनकी इज्जत करते थे।
  • उन्होंने अलग-अलग मुस्लिम इलाकों को जोड़कर एक मजबूत साम्राज्य बनाया था।
  • उन्होंने शुरुआत में नूरुद्दीन जंगी के साथ काम किया था और वहीं से उन्होंने सेना और शासन का अनुभव लिया था।
  • उनके दौर और क्रूसेड्स पर आधारित फिल्म Kingdom of Heaven बनाई गई थी, जिसमें उस समय के युद्ध और हालात दिखाए गए थे।
  • इतना बड़ा शासक होने के बावजूद उनके पास ज्यादा पैसा नहीं बचा था क्योंकि वे लोगों की मदद करते रहते थे।

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