ज़मज़म का पानी इस्लाम में बहुत पवित्र माना जाता है। यह मक्का शहर में काबा शरीफ के पास मौजूद एक खास कुएं का पानी है। दुनिया भर से जो मुसलमान हज और उमरा करने जाते हैं, वे इस पानी को पीते हैं और अपने साथ घर भी लेकर आते हैं।
इस पानी को सिर्फ साधारण पानी नहीं माना जाता, बल्कि इसे अल्लाह की खास नेमत माना जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार यह पानी चमत्कार के रूप में जमीन से निकला था और हजारों सालों से लगातार बह रहा है।
ज़मज़म के पानी का इतिहास
ज़मज़म का इतिहास हजरत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम), उनकी पत्नी हाजरा और उनके बेटे हजरत इस्माइल (अलैहिस्सलाम) से जुड़ा हुआ है।
जब अल्लाह के हुक्म से हजरत इब्राहीम अपनी पत्नी हाजरा और छोटे बच्चे इस्माइल को मक्का की सूखी और बंजर घाटी में छोड़कर गए, तब वहां ना पेड़ थे, ना पानी और ना ही कोई इंसान।
कुछ समय बाद खाने और पानी का सामान खत्म हो गया। तेज गर्मी में छोटे इस्माइल को बहुत प्यास लगी और वह रोने लगे। यह देखकर मां हाजरा बहुत परेशान हो गईं।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| नाम | ज़मज़म का पानी |
| स्थान | मक्का, सऊदी अरब – मस्जिद अल हराम में काबा के पास |
| धार्मिक महत्व | इस्लाम में सबसे पवित्र पानी माना जाता है |
| इतिहास | हजरत हाजरा और हजरत इस्माइल की कहानी से जुड़ा |
| खोज | माना जाता है कि जमीन से चमत्कारिक रूप से निकला |
| पुनः खोज | हजरत मुहम्मद ﷺ के दादा अब्दुल मुत्तलिब द्वारा दोबारा खोजा गया |
| उपयोग | पीने, दुआ करने और धार्मिक कार्यों में |
| खासियत | बरकत, शिफा और ताकत देने वाला माना जाता है |
| वैज्ञानिक गुण | मिनरल्स से भरपूर और साफ पानी |
| आज की स्थिति | पाइपलाइन और डिस्पेंसर के जरिए हाजियों तक पहुंचाया जाता है |
| अन्य नाम | शिफा का पानी, बरकत का पानी, पवित्र पानी |
| जुड़ा धार्मिक कार्य | हज और उमराह के दौरान पिया जाता है |
सफा और मरवा के बीच दौड़ की कहानी
पानी की तलाश में हाजरा सफा पहाड़ी पर गईं और चारों तरफ देखा। जब कहीं पानी नहीं दिखा तो वे मरवा पहाड़ी की तरफ दौड़ीं।
उन्होंने ऐसे ही सफा और मरवा के बीच कुल 7 बार दौड़ लगाई। आज भी हज और उमरा में मुसलमान इसी को याद करके सई करते हैं।
जब हाजरा सातवीं बार मरवा पहाड़ी पर पहुंचीं, तब उन्होंने देखा कि जमीन से पानी निकल रहा है। यह पानी वहीं से निकला जहां इस्माइल लेटे हुए थे।
हाजरा ने पानी को रोकने की कोशिश की और कहा — “ज़म ज़म” यानी रुक जाओ। तभी से इस पानी का नाम ज़मज़म पड़ गया।
ज़मज़म ने मक्का को जिंदगी दी
ज़मज़म के पानी की वजह से वहां जिंदगी शुरू हुई। बाद में जुरहम कबीले के लोग वहां आकर बस गए।
धीरे-धीरे मक्का एक बड़ा व्यापारिक शहर बन गया। कारवां आने लगे और लोग यहां रहने लगे।
काबा का निर्माण
कई साल बाद हजरत इब्राहीम वापस आए और अल्लाह के हुक्म से उन्होंने अपने बेटे इस्माइल के साथ मिलकर काबा का निर्माण किया।
आज काबा मुसलमानों का सबसे पवित्र स्थान है और पूरी दुनिया के मुसलमान नमाज पढ़ते समय इसी दिशा की तरफ मुंह करते हैं।
ज़मज़म के कुएं की दोबारा खोज
समय के साथ ज़मज़म का कुआं छिप गया था। कई सालों तक लोगों को इसकी जगह पता नहीं थी।
बाद में हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दादा अब्दुल मुत्तलिब को सपना आया, जिसमें उन्हें कुएं की जगह बताई गई।
उन्होंने खुदाई करवाई और फिर से ज़मज़म का कुआं मिल गया।

ज़मज़म के पानी का धार्मिक महत्व
इस्लाम में ज़मज़म के पानी को बहुत खास माना जाता है।
हदीस के अनुसार:
- यह सबसे बेहतरीन पानी माना जाता है
- इसमें भूख मिटाने की ताकत होती है
- बीमारियों में शिफा मिलती है
- जिस नियत से पिया जाए, वैसा फायदा होता है
ज़मज़म के पानी के वैज्ञानिक फायदे
कुछ रिसर्च में पाया गया है कि:
- इसमें बैक्टीरिया बहुत कम या नहीं होते
- इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है
- यह शरीर को एनर्जी देता है
- इम्युनिटी मजबूत करने में मदद करता है
- एसिडिटी कम करने में मदद करता है
आज के समय में ज़मज़म का पानी
आज ज़मज़म का कुआं मस्जिद अल हरम के अंदर काबा के पास मौजूद है। अब इसे बेसमेंट में सुरक्षित रखा गया है।
सऊदी सरकार पाइपलाइन और मशीनों के जरिए लाखों हाजियों तक यह पानी पहुंचाती है। बोतलों में भरकर भी दिया जाता है।
ज़मज़म के दूसरे नाम
पानी को कई नामों से जाना जाता है, जैसे:
- शिफा
- तआमुल अबरार
- तैयबा
- सुक़्या
- बिर्रा
ज़मज़म से जुड़ी खास बात
ज़मज़म का पानी हजारों साल से लगातार निकल रहा है। यह दुनिया के सबसे पुराने चलने वाले पानी के स्रोतों में से एक माना जाता है।
निष्कर्ष
ज़मज़म का पानी सिर्फ पानी नहीं है, बल्कि यह इस्लामी इतिहास, ईमान और भरोसे की निशानी है। यह हजरत हाजरा के सब्र और अल्लाह पर भरोसे की याद दिलाता है।
आज भी दुनिया भर के मुसलमान इस पानी को इज्जत और प्यार से पीते हैं और इसे अल्लाह की खास नेमत मानते हैं।
ज़मज़म पानी के कुछ महत्वूर्ण तथ्य
- ज़मज़म का कुआँ सऊदी अरब के मक्का शहर में मस्जिद अल-हरम के अंदर काबा के पास स्थित है और यह इस्लाम में बेहद पवित्र माना जाता है।
- माना जाता है कि यह कुआँ लगभग 4000 साल पुराना है और इसका संबंध हजरत इब्राहिम (AS), हाजरा (RA) और हजरत इस्माइल (AS) की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है।
- ज़मज़म कुएँ की गहराई लगभग 30–35 मीटर के आसपास मानी जाती है और इसमें लगातार पानी आता रहता है।
- वैज्ञानिक जांच में पाया गया है कि ज़मज़म पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य खनिज तत्व सामान्य पानी से अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
- यह कुआँ लाखों हज और उमराह यात्रियों के उपयोग के बावजूद कभी सूखा नहीं है और इसका पानी लगातार उपलब्ध रहता है।
