बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में सरगम नाम की एक प्यारी और समझदार लड़की रहती थी। उसे रात का आसमान बहुत पसंद था। हर रात वह अपने घर की छत पर जाकर चाँद को देखा करती थी। चाँद की दूधिया रोशनी उसके चेहरे पर पड़ती तो वह मुस्कुरा उठती। उसे लगता जैसे चाँद उससे बात कर रहा हो, जैसे वह उसका कोई पुराना दोस्त हो।
सरगम की दादी उसे अक्सर चाँद की परी की कहानियाँ सुनाती थीं। दादी कहती थीं कि चाँद पर एक सुंदर परी रहती है, जो रात में चरखे पर चाँदी जैसा धागा कातती है और उससे अपनी चमकीली चादर बनाती है। उस चादर के छोटे-छोटे टुकड़े धरती पर चाँदनी बनकर गिरते हैं। सरगम इन कहानियों को सुनते-सुनते सो जाती, लेकिन उसके मन में हमेशा एक सवाल रहता — क्या सच में चाँद पर कोई परी रहती है?
एक रात सरगम चाँद को देखते-देखते सो गई। उसने सपना देखा कि आसमान बहुत शांत है और चाँद पहले से ज्यादा चमक रहा है। तभी चाँद की रोशनी से एक उजली आकृति नीचे उतरने लगी। वह सच में चाँद की परी थी। उसके पंख मोतियों की तरह चमक रहे थे और उसके कपड़े चाँदी की रोशनी जैसे थे।
परी मुस्कुराकर बोली, “सरगम, मैं जानती हूँ तुम मुझे रोज़ देखती हो। बताओ, तुम क्या चाहती हो?”
सरगम ने धीरे से कहा, “परी माँ, मुझे उड़ने की शक्ति चाहिए ताकि मैं ऊपर से पूरी दुनिया देख सकूँ।”
परी मुस्कुराई और बोली, “उड़ना सिर्फ आसमान तक जाना नहीं होता। इसके लिए दिल में सच्चाई, हिम्मत, धैर्य और दया होनी चाहिए। अगर तुम वादा करो कि तुम हमेशा अच्छा काम करोगी, तो मैं तुम्हें उड़ने की शक्ति दूँगी।”
सरगम ने तुरंत कहा, “मैं वादा करती हूँ।”
परी ने अपनी चाँदी की छड़ी से सरगम के माथे को छुआ। अचानक सरगम को लगा जैसे उसका शरीर हल्का हो गया है। वह धीरे-धीरे हवा में उठने लगी। नीचे उसका गाँव छोटा-सा दिख रहा था। खेत, नदी, पेड़ सब खिलौनों जैसे लग रहे थे। हवा उसके कानों में संगीत की तरह गूंज रही थी।
कुछ देर में वह बादलों तक पहुँच गई। सफेद बादल रूई जैसे थे। सरगम हँसते हुए उनके बीच खेलने लगी। तभी दो चमकीले नीले पक्षी उसके पास आए। उन्होंने कहा कि वे आसमान के रक्षक हैं और उसे कुछ जादुई दिखाना चाहते हैं। वे उसे एक चमकते इंद्रधनुष के पास ले गए। जब सरगम इंद्रधनुष के रंगों से गुज़री, तो उसे लगा हर रंग उसे कुछ सिखा रहा है — लाल ने हिम्मत दी, नारंगी ने खुशी दी, पीले ने चमक दी, हरे ने शांति दी, नीले ने समझ दी और बैंगनी ने सपने दिए।
इंद्रधनुष के पार एक जादुई द्वीप था। वहाँ फूल हवा में तैर रहे थे और पेड़ों से घंटियों जैसी आवाज़ आ रही थी। वहाँ एक छोटा चमकीला जीव आया, जिसका नाम तीरम था। उसने कहा कि यहाँ वही आ सकता है जिसका दिल सच्चा हो। सरगम ने हिम्मत से सिर हिलाया।
तीरम उसे एक झील के पास ले गया। झील का पानी आईने जैसा साफ था। उसमें सरगम ने देखा कि एक छोटा पक्षी घायल है और उड़ नहीं पा रहा। सरगम दुखी हो गई। तभी झील के किनारे एक नीली जड़ी उग आई। उसने उस जड़ी से पक्षी को ठीक कर दिया। सरगम खुश होकर बोली कि दिल की दया भी जादू बन सकती है।
फिर वे एक पहाड़ पर पहुँचे जहाँ हवा में पारदर्शी सीढ़ियाँ थीं। सरगम पहले डर गई, लेकिन फिर उसने खुद पर विश्वास किया और ऊपर चढ़ गई। पहाड़ की चोटी पर चाँद की परी उसका इंतज़ार कर रही थी।
परी ने उसे एक चमकदार किताब दी और कहा कि इसमें ज्ञान और अच्छे विचार हैं। फिर परी उसे उसके बिस्तर पर छोड़ गई।
सुबह जब सरगम जागी, तो उसे लगा कि यह सपना था। लेकिन उसके पास वही चमकदार किताब रखी थी। अब वह समझ गई कि सपने सच हो सकते हैं अगर दिल सच्चा हो।
उस दिन के बाद सरगम पहले से ज्यादा अच्छी, दयालु और हिम्मत वाली बन गई। वह हर किसी की मदद करती और हमेशा अपने सपनों पर विश्वास रखती।
सीख — सपने देखने वाला इंसान ही नई दुनिया बना सकता है। हिम्मत, दया और सच्चाई ही असली जादू हैं।
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