कहते हैं भगवान हर रिश्ते को खून से नहीं जोड़ते।
कुछ रिश्ते दिल से बनते हैं… और वो रिश्ते होते हैं दोस्ती के।
सच्चा दोस्त वो होता है —
जो आपके साथ खड़ा नहीं होता…
बल्कि आपके लिए आगे खड़ा होता है।
ऐसा दोस्त मिलना किस्मत की बात होती है।
मेरी कहानी – मेरा नाम सुनील है
मेरा नाम सुनील है। मैं राजस्थान के अलवर का रहने वाला हूँ।
ये घटना आज से लगभग 16 साल पहले की है।
मेरी गली में ही एक लड़का रहता था — अजित।
हम बचपन से दोस्त थे।
हमारी दोस्ती हमारी उम्र जितनी पुरानी थी।
हम साथ पढ़े
साथ खेले
साथ बड़े हुए
हमारे परिवारों में झगड़े होते थे…
लेकिन हम दोनों में कभी नहीं।
हमारी दोस्ती कैसी थी?
अगर मैं दुखी होता — अजित पहले आ जाता।
अगर वो परेशान होता — मैं पहले पहुँच जाता।
हम हर महीने साथ फिल्म देखते थे।
हर शाम साथ घूमते थे।
अगर एक दिन नहीं मिलते — तो दिन अधूरा लगता।
वो हादसा जिसने सब बदल दिया
2007 की बात है।
हम दोनों बाइक से ऋषिकेश जा रहे थे।
सोचा गंगा जी में डुबकी लगाएंगे।
सुबह 5 बजे निकल गए।
हरिद्वार पार करने के बाद…
एक मोड़ पर अचानक सामने कार आ गई।
हमने ब्रेक मारा…
रेत थी…
बाइक फिसल गई…
और हम गहरे गड्ढे में गिर गए।
होश आया… लेकिन जिंदगी बदल चुकी थी
जब मुझे होश आया…
मैं अस्पताल में था।
मेरी टांग टूट चुकी थी।
शरीर पर बहुत चोटें थीं।
लेकिन असली दर्द तब हुआ…
जब पता चला —
अजित नहीं बचा।
दोस्त के बिना जिंदगी
मेरी दुनिया खत्म हो गई।
मैं डिप्रेशन में चला गया।
नौकरी छोड़ दी।
किसी से बात नहीं करता था।
बस एक ही बात सोचता —
काश मैं भी उसके साथ चला जाता।
पहली बार – दोस्त वापस आया
कई महीने बाद मैं फिल्म देखने गया।
थियेटर लगभग खाली था।
अचानक किसी ने मेरे हाथ पर हाथ रखा…
मैंने देखा…
वो अजित था।
वो हंस रहा था।
उसने कहा —
“तू मुझे इतना याद करता है…
तो मुझे आना ही पड़ा।”
घर पर भी मिलने लगा
उस रात घर आकर भी वो मेरे पास आया।
हम साथ लेटे।
बहुत बातें की।
मैं महीनों बाद हंसा था।
लेकिन मेरी पत्नी डर गई।
परिवार ने क्या किया
घरवालों ने पंडित बुलाया।
हवन कराया।
मंत्र वाला काला धागा पहनाया।
उसके बाद अजित आना बंद हो गया।
फिर हुआ जिंदगी का सबसे खतरनाक दिन
एक दिन मैं पुराने खेत देखने गया।
रास्ते में कुछ गुंडों ने मुझे घेर लिया।
उन्होंने मुझे लूटा।
चाकू से हमला किया।
मुझे मरा समझकर जंगल में फेंक दिया।
लेकिन मैं बच गया… कैसे?
जब होश आया —
मैं अस्पताल में था।
मैंने पूछा —
मुझे यहाँ कौन लाया?
पापा रोने लगे…
उन्होंने कहा —
तुझे अजित अस्पताल लाया था।
मौत के बाद भी निभाई दोस्ती
अस्पताल वालों ने बताया —
एक लड़का तुझे लेकर आया था।
फोटो दिखाया —
वो अजित ही था।
उसने —
मेरी बाइक लाई
मेरा फोन रखा
मेरे पैसे रखे
मेरी चेन रखी
और मुझे बचा गया।
दोस्ती मौत से बड़ी होती है
शायद अजित ये कहना चाहता था —
“अगर तू अपनी जिंदगी जी चुका है…
तो अब मेरी जिंदगी भी तू ही जी।”
कहानी की सीख
- सच्ची दोस्ती —
- समय से बड़ी होती है
- दूरी से बड़ी होती है
- और कभी-कभी… मौत से भी बड़ी होती है।
