मूसलाधार बारिश हो रही थी। आसमान काले बादलों से ढका था और ठंडी हवा पेड़ों को झुका रही थी। तनवीर अपनी कोठी के कमरे की खिड़की के पास बैठा बाहर का नज़ारा देख रहा था। सामने बड़ा सा लॉन था, जिसमें दो पेड़ बारिश में झूम रहे थे।
लेकिन बाहर की खुशी उसके दिल तक नहीं पहुँच रही थी। उसकी ज़िंदगी सूखे मैदान जैसी हो चुकी थी — जहाँ उम्मीद का एक कतरा भी नहीं था।
दो साल पहले उसने एक लड़की से मोहब्बत की थी — सुरैया। मगर वो मोहब्बत सिर्फ उसकी तरफ से थी। सुरैया ने कभी उसे उस नज़र से नहीं देखा। उस दिन के बाद तनवीर का दिल जैसे अंदर ही अंदर खाली हो गया था।
वो बारिश वाला दिन
एक दिन सावन की बारिश शुरू हुई। तनवीर बाहर लॉन में बैठा आम खा रहा था। तभी उसे हँसी और शोर की आवाज़ सुनाई दी।
उसने पास वाली कोठी की तरफ देखा। वहाँ दो लड़कियाँ बारिश में भीगते हुए हँस रही थीं। वो बारिश का आनंद ले रही थीं — जैसे दुनिया में कोई चिंता ही न हो।
तनवीर पहली बार किसी लड़की को इस तरह देख रहा था — खुलकर खुश, बेफिक्र, जिंदा दिल।
उन्हीं में से एक लड़की पर उसकी नज़र ठहर गई।
उसकी मुस्कान… उसकी आँखों की चमक…
कुछ ऐसा था जिसने तनवीर के दिल में हलचल पैदा कर दी।
उस दिन के बाद वो अक्सर उसी जगह खड़ा होकर उसे देखने की कोशिश करता। वो लड़की उसके लिए एक ख्वाब बन गई।
पहली मुलाकात
कई दिनों बाद एक दिन किस्मत ने उसे मौका दिया।
तनवीर कार लेकर कहीं जा रहा था। तभी उसने देखा — वही लड़की सड़क पर खड़ी थी। उसने हाथ देकर कार रोकी और लिफ्ट माँगी।
तनवीर का दिल तेज़ धड़कने लगा।
उसे लगा जैसे उसकी जिंदगी की तलाश खत्म हो गई हो।
कार में बैठकर लड़की मुस्कुरा कर बात करती रही।
बारिश, मौसम, रास्ता — सब कुछ खूबसूरत लगने लगा।
तनवीर ने पहली बार महसूस किया कि शायद वो फिर से खुश हो सकता है।
सच का सामना
जब वो लड़की को उसके बताए पते पर छोड़ने पहुँचा…
तो तनवीर की दुनिया जैसे रुक गई।
वो जगह गलत थी।
बहुत गलत।
उसे समझ आ गया कि वो लड़की किस मजबूरी में जी रही थी।
लड़की ने जाते हुए मुस्कुरा कर कहा —
“कभी मिलना हो तो शाम को आ जाना…”
उसकी मुस्कान में दर्द था…
और तनवीर के दिल में खालीपन।
आखिरी एहसास
तनवीर वापस अपनी कोठी आ गया।
बारिश अभी भी हो रही थी।
उसे लगा —
आसमान रो रहा है…
या शायद वो खुद।
उस दिन उसे समझ आया —
हर खूबसूरत चीज़ हमारी किस्मत में नहीं होती।
कुछ लोग बस याद बनकर रह जाते हैं।
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