चुहिया और एक ततैये की कहानी : अलिफ़ लैला (Chuhiya Aur Tataiye Ki Kahani)

चुहिया और एक ततैये की कहानी : अलिफ़ लैला (Chuhiya Aur Tataiye Ki Kahani)

एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनका घर छोटा था लेकिन दिल बहुत बड़ा था। उसी घर के कोने में एक छोटी चुहिया भी रहती थी और छत के पास एक मादा ततैया ने भी अपना घर बना लिया था। दोनों एक-दूसरे को जानती थीं और कभी-कभी बातें भी कर लेती थीं।

एक दिन किसान का एक पुराना दोस्त बहुत बीमार हो गया। डॉक्टर ने उसे कहा कि अगर वह रोज धुले हुए तिल खाएगा तो जल्दी ठीक हो जाएगा। किसान अपने दोस्त की मदद करना चाहता था, इसलिए वह गाँव के एक आदमी के पास गया और उससे तिल उधार माँगे। उस आदमी ने दया दिखाते हुए किसान को एक डिब्बा भर तिल दे दिए।

किसान तिल घर लेकर आया और अपनी पत्नी से बोला,
“इन तिलों को अच्छे से धोकर सुखा दो, मुझे कल अपने दोस्त को देने हैं।”

पत्नी ने तिल धोए, उनका छिलका साफ किया और धूप में सुखाने के लिए आँगन में फैला दिए।

ऊपर बैठी मादा ततैया यह सब देख रही थी। उसे तिल बहुत पसंद थे। उसने सोचा — “इतने सारे तिल हैं, अगर मैं थोड़ा-थोड़ा ले जाऊँ तो किसी को पता भी नहीं चलेगा।”

फिर क्या था, वह एक-एक तिल उठाकर अपने छेद में ले जाने लगी। पूरा दिन वह यही काम करती रही। धीरे-धीरे उसने बहुत सारे तिल जमा कर लिए।

शाम को किसान की पत्नी आँगन में आई तो उसने देखा कि तिल कम हो गए हैं। पहले तो वह घबरा गई, फिर उसने सोचा — “पता लगाना पड़ेगा कि तिल कौन ले जा रहा है।”

वह चुपचाप पास में बैठकर देखने लगी।

कुछ देर बाद मादा ततैया तिल लेने आई। लेकिन उसने देखा कि किसान की पत्नी वहीं बैठी है। वह डर गई। उसने सोचा — “अब अगर मैं चोरी करती पकड़ी गई तो मेरी जान भी जा सकती है। बेहतर है मैं अच्छा काम करूँ।”

अब उसने अपने छेद से तिल निकालकर वापस वहीं रखना शुरू कर दिया जहाँ से वह लाई थी।

किसान की पत्नी ने यह देखा तो सोचा — “अरे! यह तो हमारे तिल वापस ला रही है। मतलब यह चोर नहीं है। असली चोर कोई और है।”

वह फिर से छिपकर बैठ गई।

उधर ततैया चुहिया के पास गई और बोली —
“बहन, जो दोस्ती में सच्चा नहीं होता, वह अच्छा नहीं होता।”

चुहिया बोली —
“तुम ऐसा क्यों कह रही हो?”

ततैया बोली —
“आज घर में बहुत सारे तिल आए हैं। सबने पेट भर खा लिए हैं, फिर भी बहुत बचे हैं। अगर तुम भी जाकर खा लो तो तुम भी मजे में रहोगी।”

चुहिया लालची हो गई। उसने सोचा — “मुझे भी खूब तिल खाने चाहिए।”

वह बिना सोचे समझे आँगन की तरफ दौड़ पड़ी। उसे यह नहीं दिखा कि किसान की पत्नी हाथ में डंडी लेकर बैठी है।

जैसे ही चुहिया तिल खाने लगी, किसान की पत्नी ने उसे देख लिया और गुस्से में डंडी मार दी। बेचारी चुहिया वहीं मर गई।

ततैया दूर से यह सब देख रही थी। उसने सोचा —
“लालच हमेशा बुरा नतीजा देता है।”

सीख:

  • लालच कभी अच्छा नहीं होता।
  • बिना सोचे कोई काम नहीं करना चाहिए।
  • सच्चाई और समझदारी हमेशा काम आती है।

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