बहुत समय पहले एक गाँव में एक समझदार शेख रहता था। गाँव में लोग उसकी बहुत इज्जत करते थे। वह मेहनती था और अपने जानवरों का बहुत ध्यान रखता था। उसके पास बहुत सारे मुर्गे और मुर्गियाँ थीं। वह उनके अंडे खाता था और कुछ बेच भी देता था।
उन मुर्गों में एक बूढ़ा मुर्गा भी था। वह उम्र में बड़ा था लेकिन बहुत समझदार और चालाक था। उसने जिंदगी में बहुत कुछ देखा था, इसलिए वह जल्दी किसी पर भरोसा नहीं करता था।
मुर्गा रास्ता भटक गया
एक दिन बूढ़ा मुर्गा खेतों में घूमने निकल गया। चलते-चलते वह गेहूं, जौ और तिल के दाने खाता जा रहा था। घूमने में इतना मग्न हो गया कि उसे पता ही नहीं चला कि वह घर से बहुत दूर निकल आया है।
जब उसने चारों तरफ देखा तो उसे समझ आया कि वह जंगल के पास आ गया है। वहाँ कोई अपना नहीं था। वह थोड़ा डर गया।
तभी उसने दूर से एक लोमड़ी को अपनी तरफ आते देखा। लोमड़ी को देखकर मुर्गे के होश उड़ गए।
मुर्गा समझदारी दिखाता है
मुर्गे को पास में एक ऊँची दीवार दिखी। वह तुरंत उड़कर दीवार पर बैठ गया। अब वह थोड़ा सुरक्षित महसूस करने लगा।
लोमड़ी दीवार के नीचे आकर खड़ी हो गई। वह मुर्गे को देख रही थी और उसके मुँह में पानी आ रहा था। लेकिन वह दीवार पर चढ़ नहीं सकती थी।
लोमड़ी की चालाकी
लोमड़ी मीठी आवाज में बोली —
“मुर्गे भाई, सलाम! तुम कैसे हो? नीचे आओ, मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।”
मुर्गा चुप रहा।
लोमड़ी फिर बोली —
“क्या तुम्हें याद नहीं? हम पहले दोस्त थे। मैं तुम्हें अच्छी जगह ले जाना चाहती हूँ।”
फिर उसने झूठी कहानी सुनाई —
“जंगल में अब शांति हो गई है। शेर और चील ने सब जानवरों और पक्षियों को मिलकर रहने को कहा है। अब कोई किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता। तुम आराम से नीचे आ जाओ।”
लेकिन मुर्गा समझदार था। वह जानता था कि लोमड़ी झूठ बोल रही है। वह चुपचाप बैठा रहा।
मुर्गे की चालाकी
कुछ देर बाद मुर्गा बोला —
“लोमड़ी बहन, मैं नीचे आता, लेकिन पहले एक बात बताओ। क्या तुम देख रही हो उधर धूल उड़ रही है?”
लोमड़ी घबरा गई —
“नहीं… क्या है वहाँ?”
मुर्गा बोला —
“मुझे लगता है कुछ शिकारी कुत्ते इधर आ रहे हैं।”
यह सुनकर लोमड़ी डर गई। उसे शिकारी कुत्तों से बहुत डर लगता था।
लोमड़ी बोली —
“मुझे अब जाना चाहिए।”
और वह तुरंत वहाँ से भाग गई।
मुर्गे की जीत
लोमड़ी के जाने के बाद मुर्गा नीचे उतरा। उसने भगवान का शुक्रिया किया कि वह बच गया।
फिर वह धीरे-धीरे अपने मालिक के घर वापस चला गया। अब वह और ज्यादा सावधान रहने लगा।
कहानी से सीख
- मीठी बातों में जल्दी भरोसा नहीं करना चाहिए।
- मुश्किल समय में दिमाग से काम लेना चाहिए।
- समझदारी ताकत से ज्यादा काम आती है।
- दुश्मन अक्सर दोस्त बनकर आता है।
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