बहुत समय पहले की बात है। आसमान के पार, इंद्रधनुष के रंगों से सजी एक जादुई दुनिया थी — परिस्तान। यह ऐसी जगह थी जहाँ सिर्फ खुशियाँ थीं। वहाँ न दुख था, न झगड़ा, न बीमारी। चारों तरफ चमकते फूल, मीठा संगीत और जादू की रोशनी फैली रहती थी। परियाँ वहाँ हँसती-खेलती रहती थीं और सब एक-दूसरे की मदद करती थीं।
परिस्तान की सात सबसे सुंदर और समझदार परियाँ अक्सर धरती की कहानियाँ सुना करती थीं। वे सुनती थीं कि धरती पर बड़े-बड़े जंगल हैं, ऊँचे पहाड़ हैं, मीठे पानी की नदियाँ हैं और रंग-बिरंगे फूलों से भरे बगीचे हैं। एक दिन सबसे बड़ी परी बोली,
“हम हमेशा धरती की सुंदरता की बातें सुनते हैं, क्यों न आज हम खुद जाकर देखें?”
सब परियाँ खुशी से तैयार हो गईं। उन्होंने अपने चमकदार पंख फैलाए और जादुई रोशनी के रास्ते से उड़ती हुई धरती पर आ गईं।
धरती की सुंदरता देखकर परियाँ रह गईं हैरान
जैसे ही परियाँ धरती पर उतरीं, वे आश्चर्य में पड़ गईं। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी। पेड़ों पर हरे पत्ते चमक रहे थे। फूलों से खुशबू आ रही थी। झरनों का पानी संगीत की तरह बह रहा था। आसमान नीला था और बादल धीरे-धीरे तैर रहे थे।
पक्षी मधुर आवाज़ में गा रहे थे। हिरण और खरगोश कूदते-फाँदते घूम रहे थे। खेतों में सुनहरे गेहूँ हवा के साथ लहरा रहे थे। धरती सच में बहुत सुंदर थी।
उसी समय उनकी नजर एक बड़े सुंदर बगीचे पर पड़ी। वहाँ तरह-तरह के फूल थे — लाल, पीले, नीले, बैंगनी। फूलों के चारों ओर रंग-बिरंगी तितलियाँ उड़ रही थीं।
परियाँ तितलियों को देखकर बहुत खुश हुईं। एक छोटी परी बोली,
“काश हम भी तितली बनकर ऐसे ही उड़ पाते!”
सब परियाँ मुस्कराईं और उन्होंने जादू किया। अगले ही पल वे खुद तितलियाँ बन गईं। किसी के पंख नीले थे, किसी के लाल, किसी के सुनहरे और किसी के हरे।
अब वे फूलों पर बैठतीं, फिर उड़ जातीं, कभी पत्तियों पर झूलतीं, कभी हवा में गोल-गोल घूमतीं। धीरे-धीरे यह उनका रोज़ का खेल बन गया।
हरजोध और तितली-परी की मुलाकात
एक दिन बगीचे में एक छोटा बच्चा आया। उसका नाम था हरजोध। वह बहुत जिज्ञासु और प्यारा बच्चा था। उसे प्रकृति से बहुत प्यार था।
वह फूलों के बीच खेल रहा था, तभी उसकी नजर एक बहुत सुंदर तितली पर पड़ी। उसके पंख सबसे ज्यादा चमकीले थे। वह असल में एक परी थी।
हरजोध ने जल्दी से उसे पकड़ लिया। तितली-परी डर गई। वह सोचने लगी —
“अगर यह बच्चा मुझे छोड़कर नहीं गया तो मैं परिस्तान कैसे जाऊँगी?”
तितली कुछ बोल नहीं सकती थी, लेकिन हरजोध को लगा जैसे तितली की आँखें कुछ कह रही हैं। उसने धीरे से पूछा,
“क्या तुम उड़ना चाहती हो?”
तितली ने धीरे-धीरे अपने पंख हिलाए।
हरजोध मुस्कराया और बोला,
“जाओ, तुम आज़ाद हो।”
जैसे ही उसने तितली को छोड़ा, वह उड़ गई। थोड़ी देर बाद आसमान में एक चमकदार रोशनी बनी और गायब हो गई।
सपने में परिस्तान की यात्रा
उस रात हरजोध को एक अजीब लेकिन सुंदर सपना आया। उसके सामने वही तितली आई — लेकिन अब वह एक चमकदार परी बन चुकी थी।
परी बोली,
“हरजोध, तुमने मुझे आज़ादी दी। इसलिए मैं तुम्हें एक खास तोहफा देने आई हूँ।”
अचानक हरजोध हवा में उड़ने लगा। वे दोनों चमकदार रास्ते से उड़ते हुए परिस्तान पहुँच गए।
वहाँ सब कुछ जादुई था। झील का पानी मीठा था। पेड़ चमक रहे थे। परियाँ हँस रही थीं।
परी ने हरजोध को जादुई फल खिलाए — मीठे आम, रस भरे अनानास और जादुई सेब। फिर उसे एक चमकता दूध दिया। जैसे ही उसने दूध पिया, उसे लगा जैसे वह हल्का हो गया।
हरजोध ने वहाँ खूब खेला, गाना गाया और नई परियों से दोस्ती की।
फिर परी बोली,
“अब तुम्हें वापस जाना होगा। लेकिन याद रखना — जब भी तुम किसी की मदद करोगे, हम परियाँ तुम्हारे साथ होंगी।”
सच्चाई का संकेत
सुबह जब हरजोध उठा, उसे लगा यह सपना था। लेकिन उसके तकिये के पास एक चमकदार पंख पड़ा था।
वह समझ गया — यह सपना नहीं था, सच था।
उस दिन के बाद हरजोध कभी तितलियों को पकड़ता नहीं था। वह बस उन्हें देखता, मुस्कराता और उनकी रक्षा करता।
क्योंकि अब वह जान गया था —
हर तितली में एक परी हो सकती है।
कहानी की सीख
दूसरों को आज़ादी देना सबसे बड़ा उपहार होता है।
दया, प्रेम और करुणा ही असली जादू है।
मुख्य पेज – परी कथाएँ
