गरीब किसान की कहानी | मेहनत और भगवान पर विश्वास की प्रेरणादायक कहानी

गरीब किसान की कहानी | मेहनत और भगवान पर विश्वास की प्रेरणादायक कहानी

बहुत समय पहले रामगढ़ नाम के एक छोटे से गांव में नीलेश नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसका परिवार छोटा था – उसकी पत्नी उमा और उसका एक छोटा बेटा। नीलेश के पास खेती के लिए थोड़ी सी जमीन थी और दो बैलों का एक जोड़ा था। उसी खेती के सहारे उसका परिवार जैसे-तैसे अपना गुजारा करता था।

नीलेश बहुत मेहनती इंसान था। वह सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता और देर शाम तक खेतों में काम करता। लेकिन किस्मत हमेशा मेहनती लोगों का साथ नहीं देती।

एक दिन अचानक उसके एक बैल की मृत्यु हो गई। यह खबर नीलेश के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। अब उसके पास सिर्फ एक बैल बचा था, जो काफी बूढ़ा भी हो चुका था। एक बैल से खेत जोतना बहुत मुश्किल था।

उस समय बुवाई का मौसम चल रहा था। अगर समय पर खेती नहीं होती तो पूरा साल खराब हो सकता था। नीलेश दिन-रात चिंता में डूबा रहता।

एक दिन वह घर के बाहर बैठा यही सोच रहा था कि अब क्या होगा। तभी उसकी पत्नी उमा रोते हुए उसके पास आई।

उमा बोली —
“हमारा एक बैल तो मर गया, दूसरा बूढ़ा है। आपकी तबीयत भी पहले जैसी नहीं रहती। अब खेती कैसे होगी? हम घर कैसे चलाएंगे?”

नीलेश गहरी सांस लेते हुए बोला —
“मैं भी यही सोच रहा हूँ। मुझ पर पहले से कर्ज है। अब नया बैल खरीदने के लिए कोई पैसे भी नहीं देगा। अब तो भगवान ही हमारी मदद कर सकते हैं।”

बेटे की भगवान से प्रार्थना

उनका छोटा बेटा यह सब सुन रहा था। वह अपने माता-पिता को दुखी नहीं देख सकता था। वह चुपचाप गांव के मंदिर चला गया।

मंदिर में जाकर वह भगवान शंकर की मूर्ति के सामने खड़ा हो गया और रोते हुए बोला —
“महादेव! मेरे बाबा बहुत परेशान हैं। आप सबकी मदद करते हो। कृपया हमारे बाबा की भी मदद करो।”

मंदिर के पुजारी ने उसे देखा और प्यार से पूछा —
“बेटा क्या हुआ?”

बच्चे ने सारी कहानी बता दी। पुजारी ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा —
“भगवान मेहनती और सच्चे लोगों की जरूर मदद करते हैं। तुम चिंता मत करो।”

साधु और चमत्कारी बैल

घर लौटते समय बच्चे को रास्ते में एक साधु मिले। उनके साथ एक मजबूत और सुंदर बैल था।

साधु ने पूछा —
“मेरा बैल बहुत प्यासा है। क्या यहां आसपास पानी मिलेगा?”

बच्चे ने कहा —
“आप मेरे घर चलिए। हम पानी दे देंगे।”

साधु उसके साथ घर चले गए। उमा ने बैल को पानी और चारा दिया। साधु को भी खाने के लिए खाना बनाया। उनकी सेवा देखकर साधु बहुत खुश हुए।

थोड़ी देर बाद नीलेश भी घर आ गया। उसने साधु को प्रणाम किया।

साधु बोले —
“तुम लोगों की सेवा देखकर मैं बहुत खुश हूँ। मैं कुछ दिनों के लिए अपना बैल तुम्हें देना चाहता हूँ। जब मैं वापस आऊंगा, तब इसे ले जाऊंगा।”

नीलेश पहले तो झिझका, लेकिन फिर उसने इसे भगवान की मदद समझकर स्वीकार कर लिया।

किस्मत बदलने की शुरुआत

अगले दिन नीलेश अपने पुराने बैल को लेकर खेत गया। लेकिन काम ठीक से नहीं हो रहा था।

तभी साधु का बैल वहां आया और हल के पास खड़ा हो गया। जैसे वह खुद खेत जोतना चाहता हो।

नीलेश ने हल उसके कंधों पर रखा। वह बैल इतना ताकतवर था कि उसने अकेले ही पूरा खेत कुछ ही घंटों में जोत दिया।

नीलेश की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उसने तुरंत बीज बो दिए।

उस साल बारिश भी अच्छी हुई और फसल बहुत बढ़िया हुई। पहली बार नीलेश को अच्छा मुनाफा हुआ।

मेहनत से बदली जिंदगी

धीरे-धीरे साल गुजरते गए। नीलेश और उसका बेटा मेहनत करते रहे। उनकी आर्थिक हालत सुधरने लगी। सारा कर्ज उतर गया।

उनका घर खुशियों से भर गया।

ईश्वर का संकेत

एक दिन अचानक साधु का बैल गायब हो गया। बहुत ढूंढने पर भी नहीं मिला।

बेटा डर गया और बोला —
“अब साधु महाराज आएंगे तो क्या होगा?”

नीलेश मुस्कुराकर बोला —
“बेटा, भगवान ने मुसीबत में हमारी मदद की। अब हमें अपनी मेहनत पर भरोसा करना चाहिए। अब हम खुद बैल खरीद सकते हैं।”

उसी समय उन्हें ऐसा लगा जैसे कोई उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दे रहा हो।

उस दिन के बाद बाप-बेटे और मेहनत से खेती करने लगे। धीरे-धीरे वे गांव के अच्छे किसानों में गिने जाने लगे।

कहानी से सीख

  • मेहनत कभी बेकार नहीं जाती
  • सच्चाई और सेवा का फल जरूर मिलता है
  • भगवान हमेशा मेहनती लोगों का साथ देते हैं

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