कफ़न कहानी (Kafan Story in Hindi) – प्रेमचंद

कफ़न कहानी (Kafan Story in Hindi) – प्रेमचंद

एक ठंडी सर्द रात थी। चारों तरफ गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। पूरे गाँव में अंधेरा फैला हुआ था। एक छोटी-सी टूटी झोपड़ी के बाहर एक बुझते हुए अलाव के पास घीसू और उसका बेटा माधव बैठे हुए थे।

दोनों बाप-बेटे चुपचाप आग ताप रहे थे और आग में आलू भून रहे थे, जो वे किसी खेत से चुराकर लाए थे। उसी झोपड़ी के अंदर माधव की पत्नी बुधिया प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। उसके मुँह से बार-बार दर्द भरी चीखें निकल रही थीं।

लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि घीसू और माधव अंदर जाकर उसकी मदद करने के बजाय बाहर बैठे आलू सेंक रहे थे।

घीसू ने कहा,
“लगता है वह अब नहीं बचेगी। तू जाकर देख तो आ।”

माधव झुंझलाकर बोला,
“मरना ही है तो जल्दी मर क्यों नहीं जाती? देखकर मैं क्या करूँ?”

घीसू ने उसे डाँटते हुए कहा,
“तू बड़ा बेदर्द है। साल भर जिसके साथ रहा, उसके लिए तेरे मन में ज़रा भी दया नहीं?”

माधव बोला,
“मुझसे उसका तड़पना देखा नहीं जाता।”

घीसू और माधव का स्वभाव

घीसू और माधव चमार जाति के थे और पूरे गाँव में बदनाम थे। दोनों बेहद आलसी और कामचोर थे।

घीसू एक दिन काम करता और तीन दिन आराम करता। माधव उससे भी ज्यादा आलसी था। वह आधा घंटा काम करता और फिर घंटों चिलम पीता रहता।

इसलिए गाँव में कोई उन्हें काम पर नहीं रखना चाहता था।

घर में कुछ अनाज हो तो वे कई दिन तक काम पर नहीं जाते। जब बिल्कुल भूख से हालत खराब हो जाती, तब घीसू जंगल से लकड़ियाँ काट लाता और माधव उन्हें बाजार में बेच आता।

कभी वे दूसरों के खेतों से मटर, आलू या गन्ना चुराकर खा लेते।

इस तरह उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी निकाल दी थी।

भूख और आलू

उस रात भी दोनों बहुत भूखे थे। उन्होंने खेत से खोदे हुए आलू आग में डाले और जल्दी-जल्दी खाने लगे।

इतनी भूख थी कि वे आलू ठंडे होने का इंतज़ार भी नहीं कर रहे थे। कई बार उनकी जीभ जल जाती, लेकिन वे तुरंत आलू निगल जाते।

आलू खाते-खाते घीसू को बीस साल पहले का एक भोज याद आ गया।

उसने कहा,
“एक बार ठाकुर की शादी में जो खाना मिला था, वैसा जीवन में फिर कभी नहीं मिला।”

फिर वह बड़े मजे से बताने लगा कि उस दावत में पूरी, कचौरी, सब्ज़ी, दही, मिठाई सब कुछ था और लोगों ने खूब पेट भरकर खाया था।

माधव भी कल्पना में ही उन स्वादिष्ट चीजों का स्वाद लेने लगा।

इधर झोपड़ी के अंदर बुधिया दर्द से कराह रही थी और इधर दोनों बाप-बेटे खाने की बातें कर रहे थे।

बुधिया की मौत

सुबह जब माधव झोपड़ी के अंदर गया, तो उसने देखा कि बुधिया मर चुकी है।

उसका शरीर ठंडा हो चुका था। उसके पेट में बच्चा भी मर गया था।

यह देखकर माधव जोर-जोर से रोने लगा और घीसू को बुलाने लगा।

दोनों ने मिलकर खूब रोना-धोना किया।

उनकी आवाज़ सुनकर गाँव के लोग इकट्ठे हो गए और उन्हें ढाँढस बँधाने लगे।

लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या यह थी कि अंतिम संस्कार के लिए पैसे कहाँ से आएँगे

गाँव से पैसे इकट्ठा करना

घीसू और माधव गाँव के ज़मींदार के पास गए।

ज़मींदार उन्हें पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वे बहुत आलसी और बदनाम थे।

लेकिन घीसू ने बड़ी दुखभरी आवाज़ में कहा—

“सरकार! माधव की पत्नी रात भर तड़पती रही और मर गई। हमारे पास कफ़न खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।”

ज़मींदार ने दया करके दो रुपये दे दिए।

जब लोगों ने सुना कि ज़मींदार ने पैसे दिए हैं, तो दूसरे लोगों ने भी मदद कर दी।

किसी ने दो आने, किसी ने चार आने दिए।

कुछ ही देर में उनके पास पाँच रुपये इकट्ठा हो गए।

गाँव के लोग लकड़ी और बाँस भी जुटाने लगे।

कफ़न खरीदने के लिए बाज़ार

दोपहर को घीसू और माधव कफ़न खरीदने के लिए बाज़ार गए।

रास्ते में घीसू बोला,
“लकड़ी तो मिल गई है। अब बस कफ़न लेना है।”

माधव बोला,
“हाँ, लेकिन रात में कौन कफ़न देखेगा?”

फिर दोनों ने सोचा कि कफ़न तो आखिर जल ही जाएगा

फिर उन्होंने मन ही मन सोचा कि क्यों न इन पैसों से कुछ अच्छा खा-पी लिया जाए।

शराबखाने में

घूमते-घूमते दोनों एक शराबखाने के सामने पहुँच गए।

अचानक घीसू बोला—
“साहूजी, एक बोतल शराब देना।”

फिर दोनों बैठकर शराब पीने लगे।

उन्होंने तली हुई मछली, पूरियाँ और कई तरह की चीज़ें मँगाईं और खूब मजे से खाने लगे।

घीसू बोला,
“कफ़न लगाने से क्या फायदा? आखिर वह जल ही जाएगा।”

माधव बोला,
“दुनिया का यही रिवाज़ है। बड़े लोग भी ब्राह्मणों को हजारों रुपये दे देते हैं।”

दोनों ने धीरे-धीरे सारे पैसे खाने और शराब में उड़ा दिए

अजीब संतोष

जब उनका पेट भर गया, तो माधव ने बची हुई पूरियाँ एक भिखारी को दे दीं।

घीसू ने कहा—

“ले जा, खूब खा और उसे आशीर्वाद दे। जिसकी कमाई थी, वह तो मर गई।”

दोनों शराब के नशे में गाने लगे और नाचने लगे।

आखिरकार नशे में ही वहीं जमीन पर गिर पड़े और सो गए।

उधर गाँव वाले बुधिया के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे।

कफ़न कहानी से शिक्षा

इस कहानी से कई गहरी सामाजिक बातें समझ में आती हैं—

  1. अत्यधिक गरीबी इंसान को संवेदनहीन बना सकती है।
  2. समाज में असमानता और शोषण की समस्या दिखाई देती है।
  3. मानव स्वभाव कभी-कभी स्वार्थी और विचित्र हो सकता है।
  4. गरीबी और सामाजिक व्यवस्था पर यह कहानी गहरा व्यंग्य करती है।

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