घने जंगल और ऊँचे पहाड़ों के बीच एक बहुत चालाक सियार रहता था। कई दिनों से उसे खाने को कुछ भी नहीं मिला था। भूख के मारे उसकी हालत खराब हो चुकी थी। वह इधर-उधर भटकते हुए सोच रहा था,
“काश! आज कहीं कुछ खाने को मिल जाए, नहीं तो मैं भूख से मर जाऊँगा।”
चलते-चलते वह पहाड़ों की तरफ पहुँच गया। तभी अचानक उसकी नजर सामने खड़े एक विशाल शेर पर पड़ी। शेर को देखते ही सियार का रंग उड़ गया। उसके दिल की धड़कन तेज हो गई। उसने मन ही मन सोचा,
“अरे बाप रे! अगर शेर ने मुझे देख लिया तो वह मुझे तुरंत खा जाएगा। अब मैं अपनी जान कैसे बचाऊँ?”
सियार बहुत तेज दिमाग का था। उसने तुरंत एक चाल चलने की सोची। वह ऊपर पहाड़ की बड़ी-बड़ी चट्टानों की तरफ देखने लगा और जोर-जोर से रोने लगा।
शेर ने हैरानी से पूछा,
“अरे सियार! तुम रो क्यों रहे हो?”
सियार ने डरने का नाटक करते हुए कहा,
“महाराज! क्या आपको दिखाई नहीं दे रहा? ये बड़ी-बड़ी चट्टानें हिल रही हैं। अभी गिर जाएँगी और हम दोनों उनके नीचे दबकर मर जाएँगे!”
शेर घबरा गया। उसने ऊपर देखा और बोला,
“अब क्या करें? अपनी जान कैसे बचाएँ?”
सियार ने तुरंत कहा,
“महाराज, एक उपाय है… लेकिन इसके लिए आपकी ताकत की जरूरत पड़ेगी। आप इस बड़ी चट्टान को उठाकर पकड़ लीजिए। तब तक मैं एक मजबूत लकड़ी लेकर आता हूँ, जिससे हम इसे सहारा दे देंगे और सुरक्षित बच जाएँगे।”
मूर्ख शेर सियार की बातों में आ गया। उसने पूरी ताकत लगाकर भारी चट्टान उठा ली और उसे पकड़े खड़ा हो गया।
सियार बोला,
“आप बस दो मिनट रुकिए महाराज, मैं अभी लकड़ी लेकर आता हूँ।”
इतना कहकर सियार वहाँ से ऐसी दौड़ लगाकर भागा कि पीछे मुड़कर भी नहीं देखा।
बेचारा शेर पूरी रात चट्टान पकड़े खड़ा रहा। वह सियार का इंतजार करता रहा, लेकिन सियार कभी वापस नहीं आया। तब जाकर शेर को अपनी मूर्खता का एहसास हुआ।
सीख (Moral of the Story)
अक्ल ताकत से बड़ी होती है।
जो बिना सोचे-समझे किसी की बातों में आ जाता है, उसे नुकसान उठाना पड़ता है।
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