उत्तर प्रदेश के एक शांत से गाँव में सूरज सिंह नाम का एक आदमी रहता था।
सूरज पहले पहलवानी करता था। उसकी लंबाई करीब 6 फीट थी और शरीर बहुत मजबूत था। लेकिन कुछ साल बाद उसने पहलवानी छोड़कर भगत का काम शुरू कर दिया। वह लोगों के ऊपर से बुरी शक्तियों का असर हटाता था।
पूरा गाँव उसकी बहुत इज़्ज़त करता था।
सूरज को एक चीज सबसे ज्यादा पसंद थी — मावे की बर्फी।
हर सुबह वह बर्फी खाते हुए अपने पशुओं को चराने गाँव के पास वाले बड़े मैदान में जाता था। उसी मैदान के पास एक सरकारी अस्पताल था।
अस्पताल वाला पहलवान
एक दिन अस्पताल में राशिद पहलवान नाम का आदमी भर्ती हुआ।
वह बहुत खतरनाक बीमारी से जूझ रहा था। डॉक्टरों ने कहा कि उसकी बीमारी आखिरी स्टेज पर है।
राशिद रोज खिड़की से बाहर देखता रहता था।
उसे रोज सूरज दिखता — मजबूत शरीर, बर्फी खाते हुए, बेफिक्र चलता हुआ।
धीरे-धीरे राशिद के मन में सूरज के लिए लगाव पैदा हो गया।
करीब 40 दिन बाद राशिद की मौत हो गई।
मौत के बाद शुरू हुआ डर
राशिद की मौत के कुछ दिन बाद सूरज की तबियत अचानक खराब होने लगी।
- तेज बुखार
- शरीर कमजोर
- खाना पीना बंद
- रात में डरावने सपने
डॉक्टर, वैद्य — सबने इलाज किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
20 दिन बीत गए।
बड़े भगत की एंट्री
सूरज के परिवार ने एक बड़े ज्ञानी भगत कालीनाथ बाबा को बुलाया।
उन्होंने पूजा शुरू की।
अचानक सूरज का शरीर कांपने लगा।
वह जोर से चिल्लाया —
“मुझे क्यों बुलाया?”
उसकी आवाज बदल गई थी।
आँखें लाल हो गई थीं।
गफ्फूर जिन्न का सच
फिर सूरज के शरीर से आवाज आई —
“मैं गफ्फूर जिन्न हूँ…
मैं पहले एक पहलवान था…
मुझे अपने शरीर से प्यार था…
मुझे मावे की बर्फी बहुत पसंद थी…”
उसने बताया —
अस्पताल में उसने सूरज को देखा था।
मरने के बाद उसने सूरज के साथ रहने का फैसला कर लिया।
अब वह सूरज को अपने साथ जिन्नों की दुनिया में ले जाना चाहता था।
माँ की ममता
सूरज की माँ रोने लगी और बोली —
“अगर तू मेरे बेटे को छोड़ देगा…
तो मैं तुझे भी अपना बेटा मानूँगी…”
यह सुनकर गफ्फूर जिन्न शांत हो गया।
जिन्न की शर्त
गफ्फूर जिन्न बोला —
“मैं सूरज को नहीं मारूँगा…
मैं उसके साथ रहूँगा…
लेकिन हर साल मेरी पूजा करनी होगी…
और मुझे मावे की बर्फी का भोग लगाना होगा…”
परिवार ने शर्त मान ली।
चमत्कार
कुछ ही दिनों में सूरज पूरी तरह ठीक हो गया।
लेकिन अब —
✔ उसकी ताकत बढ़ गई
✔ लोगों की समस्या जल्दी समझने लगा
✔ इलाज पहले से ज्यादा असरदार होने लगा
लोग कहते थे —
सूरज अकेला नहीं…
उसके साथ गफ्फूर जिन्न भी है।
लालची साहूकार वाली घटना
एक दिन एक गरीब किसान मोहन सूरज के पास आया।
उसकी जमीन साहूकार ने छीन ली थी।
सूरज ने आँख बंद की…
उसे गफ्फूर जिन्न की आवाज सुनाई दी…
उसने किसान से कहा —
“दो दिन में जमीन वापस मिल जाएगी।”
और सच में —
दो दिन बाद साहूकार ने डर के कारण जमीन वापस कर दी।
सबसे बड़ा हादसा
कुछ साल बाद सूरज की पत्नी को दिल का दौरा पड़ा।
सूरज उसे अस्पताल लेकर गया।
लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए।
उस रात सूरज ने पहली बार गफ्फूर जिन्न से मदद मांगी।
जिन्न बोला —
“मौत के फैसले में मैं भी कुछ नहीं कर सकता…”
उस दिन सूरज समझ गया —
हर शक्ति की एक सीमा होती है।
