देशभक्ति कविता भारत की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के प्रति प्रेम, समर्पण और बलिदान की भावना को शब्दों में पिरोकर कवियों ने ऐसी रचनाएँ दी हैं जो हर भारतीय के दिल में जोश और गर्व भर देती हैं। भारत जैसे विविधताओं से भरे महान देश में देशभक्ति केवल भावना नहीं बल्कि एक जीवन-मूल्य है, जो हमें अपने राष्ट्र, संस्कृति और विरासत से जोड़ता है।
इस लेख में हम जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता, प्रसिद्ध देशभक्ति कविताओं की सूची, प्रेरणादायक उद्धरण, देशभक्ति गीत और देशभक्ति से जुड़ी कहानियों का संग्रह प्रस्तुत कर रहे हैं। यहाँ आपको short desh bhakti kavita से लेकर महान कवियों की कालजयी रचनाओं तक सब कुछ एक ही जगह पर मिलेगा।
देशभक्ति कविता क्या है?
जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता वह होती है जो पाठक या श्रोता के भीतर देश के लिए प्रेम, साहस और बलिदान की भावना जागृत कर दे। ऐसी कविताएँ स्वतंत्रता संग्राम, वीरता, मातृभूमि के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव को केंद्र में रखकर लिखी जाती हैं और अक्सर राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल बनाती हैं।
देशभक्ति कविता
देशभक्ति कविता वह काव्य है जिसमें कवि अपने देश के प्रति प्रेम, कर्तव्य और समर्पण की भावना व्यक्त करता है। यह कविताएँ हमें अपने राष्ट्र की महानता का एहसास कराती हैं और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती हैं।
देशभक्ति कविताओं की सूची
- झाँसी की रानी — सुभद्राकुमारी चौहान
- ब्राज़ील का गीत — रोनाल्द द कैरवाल्हो
- देश-प्रेम : मेरे लिए — धूमिल
- आज देश की मिट्टी बोल उठी है — शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
- किरोव हमारे साथ है — निकोलाई तिखोनोव
- बताना उसे — आचार्य ज़ौजी
- हमारा गीत — कोंस्तान्तीन सीमोनोव
- सोवियत रूस — सर्गेई येसेनिन
- वीरों का कैसा हो वसंत? — सुभद्राकुमारी चौहान
- दमदार दावे — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- पुष्प की अभिलाषा — माखनलाल चतुर्वेदी
- उद्देश्य — संत सिंह सेखों
- देशभक्त हे! — आर. चेतनक्रांति
- क़ैदी और कोकिला — माखनलाल चतुर्वेदी
- उठ जाग मुसाफ़िर — वंशीधर शुक्ल
- क़दम क़दम बढ़ाए जा — वंशीधर शुक्ल
- देशभक्त — ह्रिस्तो बोतेव
- जेल में आती तुम्हारी याद — शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
- भारतमाता की नवरत्नमाला — सुब्रह्मण्य भारती
- सन् 1857 की जनक्रांति — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- पौर्वात्य निरंकुशता — असद ज़ैदी
- अनिद्रा में — सविता सिंह
- असहयोग — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- स्वर्गीय-संगीत — मैथिलीशरण गुप्त
- भारत माँ के पवित्र दशांक — सुब्रह्मण्य भारती
- सीलमपुर के लड़के — आर. चेतनक्रांति
- सागर खड़ा बेड़ियाँ तोड़े — माखनलाल चतुर्वेदी
- सिपाही — माखनलाल चतुर्वेदी
- तकली — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- भारत माँ की ध्वजा — सुब्रह्मण्य भारती
- निशीथ-चिंता — रामनरेश त्रिपाठी
- बिदा — सुभद्राकुमारी चौहान
- पंडित जवाहरलालजी नेहरू के प्रति — सुमित्रानंदन पंत
- स्मरणीय भाव — श्रीधर पाठक
- सबेरा हुआ है — वंशीधर शुक्ल
- पथ भूल न जाना पथिक कहीं! — शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
- भारत-धरनि — श्रीधर पाठक
- सुंदर भारत — श्रीधर पाठक
- नक़ली क़िला — मैथिलीशरण गुप्त
- हिमालय — रामधारी सिंह दिनकर
- 15 अगस्त 1947 — सुमित्रानंदन पंत
- वह देश कौन-सा है? — रामनरेश त्रिपाठी
- मुक्त गगन है, मुक्त पवन है — माखनलाल चतुर्वेदी
- 1857 : सामान की तलाश — असद ज़ैदी
- भारत माता — सुमित्रानंदन पंत
- स्वदेश — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- प्राचीन योध-स्मृति — अप्पलस्वामी पुरिपंडा
- शहीदों की चिताओं पर — जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’
- आजादी — श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
- श्री महराना प्रताप सिंह — बलभद्रप्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’
- राखी की चुनौती — सुभद्राकुमारी चौहान
- जिन चीज़ों का मतलब नहीं होगा — हरे प्रकाश उपाध्याय
- आज़ादी — सारुल बागला
- पलटनिया पिता — अनिल कार्की
- जग में अब भी गूँज रहे हैं — सियारामशरण गुप्त
- स्वागत-गीत — सुभद्राकुमारी चौहान
- भारतवर्ष — मैथिलीशरण गुप्त
- बीनापानि — श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
- रसोई हो या फिर कोई देश ताक़त से नहीं चलता — महेश चंद्र पुनेठा
- स्वराज्य-बधू — श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
- नौजवान — श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
- जीने के सौ विकल्प — कुमार कृष्ण शर्मा
- जगि रहे बापू केर सपन — श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
- तिरंगा झंडा — श्यामसुंदर मिश्र ‘मधुप’
- प्रभाती — रामधारी सिंह दिनकर
- हमारा पतन — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- अमर राष्ट्र — माखनलाल चतुर्वेदी
- मातृ-मंदिर — मैथिलीशरण गुप्त
- दीनदयाल दया करिए — प्रतापनारायण मिश्र
- देशप्रेम की कविता उर्फ़ सारे जहाँ से अच्छा… — अजय सिंह
- राष्ट्र गान — सुमित्रानंदन पंत
- जन्मभूमि — सुमित्रानंदन पंत
- जय-जय भारतवर्ष हमारे — सियारामशरण गुप्त
- महाराज पृथ्वीराज का पत्र — मैथिलीशरण गुप्त
- फलेगी डालों में तलवार — रामधारी सिंह दिनकर
- स्वतंत्रता — रामनरेश त्रिपाठी
- राष्ट्रीय वीणा — माखनलाल चतुर्वेदी
- हम सैनिक हैं — सियारामशरण गुप्त
- व्यथित हृदय — सुभद्राकुमारी चौहान
- यादगार — अलेक्सांद्र पूश्किन
- भारत गीत (1) — सुमित्रानंदन पंत
- एक हमारा देश — सियारामशरण गुप्त
- देश मेरे — रमाशंकर यादव विद्रोही
- और राष्ट्रभक्ति थी — आयुष झा
- चरखा गीत — सुमित्रानंदन पंत
- विशाल-भारत — मैथिलीशरण गुप्त
- आज़ाद हिंद फ़ौज का कड़खा — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- इलाज की प्रक्रिया — अब्दुल बिस्मिल्लाह
- मेरा देश — राहुल राजेश
- मेरी देह मिले माटी में — गोपबंधु दास
- गर्दन — अमिताभ
- मेरा देश — मैथिलीशरण गुप्त
- भारत — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- तुम्हारा भारत मेरा भारत — त्रिपुरारि
- आज़ादी आ रही है — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- कौन वीर… — कुंदुर्ति आंजनेयलू
- कामना — रामनरेश त्रिपाठी
- बाजीप्रभु देशपांडे — मैथिलीशरण गुप्त
- देशप्रेम — प्रीति चौधरी
- भारत-गगन — श्रीधर पाठक
- देशभक्ति — आस्तीक वाजपेयी
- बिकाऊ तिरंगे — दामिनी यादव
- रक्तबीज — अजीत रायज़ादा
- हिंद-वंदना — श्रीधर पाठक
- युवकों की रण-यात्रा — रामनरेश त्रिपाठी
- वतनपरस्त — सौम्य मालवीय
- स्वदेशी-होली — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
- राष्ट्रीयता — महाराज कृष्ण संतोषी
- अभिलाषा — गीता खाती
- टाइटानिक की सिंधु-समाधि — मैथिलीशरण गुप्त
- राष्ट्रवाद — रजनीश संतोष
- विबोधन — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- उठो कंकाल — गोदावरीश महापात्र
- स्वदेश गौरव — रामनरेश त्रिपाठी
- जागो जोत महान्! — तमिलमुडी
- देशभक्ति — बेबी शॉ
- निज स्वदेश ही — श्रीधर पाठक
- वर वनिता — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- देश-प्रेम — सदानंद शाही
- जन्मभूमि — रायप्रोलु वेंकट सुब्बाराव
- साम्य लहरी — वीर किशोर दास
- झंडा फहरा! — वी. रामालिंगम पिल्लै
- ज्योति भारत — सुमित्रानंदन पंत
- मातृ-मूर्ति — मैथिलीशरण गुप्त
- आभास — मैथिलीशरण गुप्त
- स्वर्ग-सहोदर — मैथिलीशरण गुप्त
- शहादत — सुनील झा
- पुण्यभूमि यह — सियारामशरण गुप्त
- मरण-त्योहार — रामेश्वर शुक्ल अंचल
- शोषितों की युद्ध-यात्रा — सोमसुंदर
- स्वराज्य की अभिलाषा — मैथिलीशरण गुप्त
देशभक्ति पर प्रेरणादायक उद्धरण
देशभक्ति केवल देश से प्यार करने का नाम नहीं है, बल्कि अपने राष्ट्र, भाषा, संस्कृति और लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भाव भी है। हमारे महान विचारकों और नेताओं ने देशप्रेम को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझाया है। नीचे दिए गए उद्धरणों को आसान और स्पष्ट भाषा में फिर से लिखा गया है, ताकि हर कोई इनके गहरे अर्थ को समझ सके।
देशप्रेम का मतलब पूरे देश से प्रेम करना है — सिर्फ लोगों से ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों, नदियों, जंगलों और धरती से भी। यह साथ रहने से पैदा होने वाला सच्चा प्रेम है।
–आचार्य रामचंद्र शुक्ल
अगर किसी को अपने देश से प्यार है, तो उसे अपनी भाषा से भी प्यार होना ही चाहिए। देशप्रेम और भाषा-प्रेम एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
–महात्मा गांधी
मनुष्य को अपने राष्ट्र की सेवा को बहुत महत्व देना चाहिए, लेकिन सच्ची देशभक्ति वही है जो अंत में पूरी मानवता की भलाई तक पहुँचती है।
–श्री अरविंद
जो व्यक्ति अपनी जाति और देश की स्वतंत्र पहचान को महसूस नहीं कर सकता, वह सच्चा देशप्रेमी नहीं कहलाता।
–आचार्य रामचंद्र शुक्ल
मेरी देशभक्ति ऐसी नहीं है जो दूसरों को नुकसान पहुँचाकर अपने देश को फायदा दे। सच्ची देशभक्ति वही है जो पूरी मानव जाति के हित में हो।
–महात्मा गांधी
सच्चा देशभक्त अपनी मातृभूमि का सच्चा पुत्र होता है।
–जयशंकर प्रसाद
देश या शासक की गलतियों को छिपाना देशभक्ति नहीं है। सच्ची देशभक्ति तो देश की बुराइयों का विरोध करने में है।
–महात्मा गांधी
देश की रक्षा में बहा हुआ खून का आखिरी कतरा दुनिया की सबसे कीमती चीज है।
–प्रेमचंद
मेरी देशभक्ति का मतलब है कि मैं पूरी निष्ठा से अपने देश की सेवा करूँ, लेकिन बिना किसी से दुश्मनी या प्रतियोगिता के।
–महात्मा गांधी
मैं देशप्रेम को अपने धर्म का हिस्सा मानता हूँ। देश से प्रेम किए बिना धर्म का पालन पूरा नहीं होता।
–महात्मा गांधी
देशभक्त अपने देश के लिए जीता भी है और जरूरत पड़े तो देश के लिए मर भी जाता है।
–श्री अरविंद
जिस व्यक्ति में इंसानियत कम है, उसकी देशभक्ति भी अधूरी होती है।
–महात्मा गांधी
अपनी मातृभाषा का ज्ञान जरूरी है। बिना अपनी भाषा जाने कोई भी व्यक्ति सच्चा देशभक्त नहीं बन सकता।
–महात्मा गांधी
मातृभूमि का भला करना हमारा धर्म है और जो इसमें रुकावट डालें, उनका सामना करना हमारा कर्तव्य है।
–गणेश शंकर विद्यार्थी
देशभक्ति का मतलब देश से प्रेम है। अगर हम चाहते हैं कि लोग देश से प्रेम करें, तो हमें देश को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
–रिचर्ड निक्सन
सच्चा देशभक्त चाहे कहीं भी चला जाए, उसे अपना देश ही सबसे श्रेष्ठ लगता है।
–ओलिवर गोल्डस्मिथ
मुझे भारतीय होने पर गर्व है और मैं भारत की अटूट एकता का हिस्सा हूँ।
–मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
देशभक्ति मनुष्य का पहला गुण है। इसके बिना वह सम्मान से जीवन नहीं जी सकता।
–महात्मा गांधी
ऐसी देशभक्ति छोड़ देनी चाहिए जो दूसरे देशों को नुकसान पहुँचाकर खुद को महान बनाना चाहती है।
–महात्मा गांधी
कुछ लोग केवल पुराने गौरव की बातें करके ही देशभक्ति समझते हैं, लेकिन सच्ची देशभक्ति वर्तमान में देश के लिए काम करने में है।
–रामतीर्थ
भारतीय जीवन का आधार शांति और संतोष है, न कि बेचैनी और आवेग।
–कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
मनुष्यता हर प्रकार की देशभक्ति और देशाभिमान से भी ऊँची चीज है।
–विनायक दामोदर सावरकर
अपनी रचनात्मक शक्ति से देश को बेहतर बनाना एक बहुत बड़ा और पवित्र काम है।
–रवींद्रनाथ टैगोर
मैं पूरे भारत को अपना शरीर मानता हूँ — उसके हर हिस्से से मेरा गहरा संबंध है। जब मैं चलता, बोलता या सांस लेता हूँ, तो मुझे लगता है कि पूरा भारत मेरे साथ है।
–रामतीर्थ
सच्ची और सर्वोच्च देशभक्ति मनुष्यता ही है।
–विनायक दामोदर सावरकर
कोई भी व्यक्ति अपनी रोज़ी-रोटी कमाते हुए भी अपने देश की सेवा कर सकता है।
–महात्मा गांधी
मेरा मानना है कि जिसने अपने धर्म को सही तरह नहीं समझा, वह सच्ची देशभक्ति को भी नहीं समझ सकता।
–महात्मा गांधी
देशभक्ति पर गीत
देश के प्रति आस्था, अनुराग और कर्तव्यपरायणता से जुड़े प्रसिद्ध देशभक्ति गीत:
- कर चले हम फ़िदा — कैफ़ी आज़मी
- हिंद देश के निवासी — अज्ञात
- होलिकापंचक — प्रतापनारायण मिश्र
- फाग — प्रतापनारायण मिश्र
- हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान — प्रतापनारायण मिश्र
- बलि-बलि जाऊँ — श्रीधर पाठक
- ई देश ककर? — सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
- 15 अगस्त 1947 — नरेंद्र शर्मा
- वीरबिदा — तोरण देवी लली
- विजय दशमी — तोरण देवी लली
- सावधान — बुंदेला बाला
- ख़ूब हुआ — तोरण देवी लली
- जय स्वदेश — तोरण देवी लली
- चाहिए ऐसे बालक — बुंदेला बाला
- संबोधन — बुंदेला बाला
- मातृभूमि का ध्यान — तोरण देवी लली
- जातीयता — तोरण देवी लली
देशभक्ति पर कहानियाँ
देश के प्रति आस्था, अनुराग और कर्तव्यपरायणता से प्रेरित चुनिंदा कहानियाँ:
- दुनिया का सबसे अनमोल रत्न — प्रेमचंद
- विपथगा — अज्ञेय
