उल्लू और शेर | Sher Ki Kahani in Hindi

उल्लू और शेर | Sher Ki Kahani in Hindi

बहुत समय पहले एक घने और सुंदर जंगल में सभी जानवर शांति से रहते थे। वहाँ हिरण, खरगोश, बंदर, हाथी, लोमड़ी और कई पक्षी मिल-जुलकर रहते थे। जंगल में हर दिन खुशियों भरा होता था। कोई किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता था।

लेकिन एक दिन जंगल की शांति टूट गई।

दूर के जंगल से एक बड़ा, ताकतवर और घमंडी शेर वहाँ आ पहुँचा। उसका शरीर विशाल था, आवाज़ डरावनी और आँखों में घमंड भरा हुआ था। उसने आते ही खुद को जंगल का राजा घोषित कर दिया।

शुरू में जानवरों ने सोचा कि शायद वह भी शांति से रहेगा। लेकिन जल्द ही उसकी असली आदत सामने आ गई।

वह बिना वजह जानवरों को डराता, उनके खाने पर कब्ज़ा कर लेता और कभी-कभी सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए उन्हें दौड़ाता। छोटे जानवर तो उसके नाम से ही काँपने लगे।

धीरे-धीरे पूरे जंगल में डर का माहौल बन गया।

एक दिन सभी जानवर एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठा हुए। सबके चेहरों पर चिंता साफ दिख रही थी।

हिरण बोला,
“अगर यह ऐसे ही रहा तो हम कभी चैन से नहीं जी पाएँगे।”

लोमड़ी ने कहा,
“हमें कुछ करना होगा। उसे सबक सिखाना ज़रूरी है।”

लेकिन तभी खरगोश डरते हुए बोला,
“पर कौन जाएगा उसके सामने? वह बहुत ताकतवर है।”

सब चुप हो गए। कोई भी शेर का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

तभी पेड़ की ऊँची डाल से एक धीमी आवाज आई।

“अगर तुम सब साथ दो, तो मैं कोशिश कर सकता हूँ।”

सबने ऊपर देखा — वह था बुद्धिमान उल्लू।

कुछ जानवर हँस पड़े।

बंदर बोला,
“तुम? इतने छोटे से होकर शेर से लड़ोगे?”

उल्लू शांत था।
“मैं ताकत से नहीं, बुद्धि से काम लूँगा।”

चूंकि कोई और आगे नहीं आया, सबने आखिरकार उल्लू की बात मान ली।

जब यह खबर शेर तक पहुँची कि एक छोटा सा उल्लू उसे चुनौती दे रहा है, तो वह ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा।

“वह छोटा सा पक्षी मुझसे लड़ेगा? यह तो मज़ाक है!”

उसने अगले दिन सुबह अपनी मांद के सामने लड़ाई की घोषणा कर दी।

अगली सुबह पूरा जंगल शेर की मांद के सामने इकट्ठा हो गया। शेर घमंड से सीना ताने खड़ा था।

लेकिन उल्लू कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।

समय बीतता गया। सूरज ऊपर चढ़ आया।

शेर चिल्लाया,
“कहाँ है वह डरपोक उल्लू?”

तभी अचानक उल्लू उड़ता हुआ आया।

“माफ़ कीजिए, मुझे आने में देर हो गई।”

शेर गरजा,
“डर गए थे क्या?”

उल्लू ने धीरे से कहा,
“नहीं, मैं तो रास्ते में एक और शेर से मिल गया था।”

सभी जानवर हैरान हो गए।

“एक और शेर?” शेर ने गुस्से में पूछा।

“हाँ,” उल्लू बोला, “वह खुद को इस जंगल का असली राजा बता रहा था। वह बहुत ताकतवर है।”

शेर की आँखों में आग जल उठी।

“मुझसे ताकतवर? मुझे उसके पास ले चलो!”

उल्लू शेर को जंगल के एक पुराने गहरे कुएँ के पास ले गया।

“वह अंदर रहता है,” उल्लू ने कहा।

शेर ने गुस्से में कुएँ में झाँका।

उसे पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी।

उसे लगा कि सचमुच कोई दूसरा शेर अंदर खड़ा है।

शेर गरजा।

“गुर्र्र्र्र!”

कुएँ में उसकी दहाड़ गूँज उठी — और भी तेज़ होकर वापस आई।

शेर को लगा कि दूसरा शेर भी उतनी ही ताकत से जवाब दे रहा है।

वह और गुस्से में गरजा।

दहाड़ फिर गूँजी।

अब शेर को डर लगने लगा।

“यह तो सच में बहुत ताकतवर है…” उसने सोचा।

डर के मारे वह पीछे हट गया और भागता हुआ जंगल छोड़कर चला गया।

और फिर कभी वापस नहीं आया।

शेर के जाने के बाद जंगल में फिर से शांति लौट आई।

जानवर उल्लू के पास आए।

“तुमने कमाल कर दिया!” हिरण बोला।

उल्लू मुस्कुराया,
“ताकत हमेशा समाधान नहीं होती। कभी-कभी दिमाग से भी बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है।”

सभी जानवरों ने उसे धन्यवाद दिया।

उस दिन से जंगल में एक नई सीख फैल गई।

कहानी से सीख

  • बुद्धिमानी ताकत से बड़ी होती है।
  • घमंड का अंत बुरा होता है।
  • समस्या का हल सोच-समझकर निकालना चाहिए।

मुख्य पेज – शेर की कहानी in Hindi

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