क्या सच में दो पल की मुलाकात में प्यार हो सकता है?
क्या सिर्फ एक नजर से दिल किसी का हो सकता है?
कई लोग कहेंगे — नहीं…
लेकिन कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है जहाँ सिर्फ एक नजर ही पूरी कहानी लिख देती है।
ये कहानी है बिहार के एक छोटे से खूबसूरत गाँव सरस्वतीपुर की।
गाँव छोटा था, लेकिन दिलों में बहुत बड़ी सादगी बसती थी। चारों ओर हरियाली, कच्ची सड़कें, सुबह-सुबह मंदिर की घंटियाँ और लोगों के चेहरों पर सच्ची मुस्कान।
गाँव से थोड़ा दूर एक छोटा सा कस्बा था — जहाँ हर हफ्ते बाजार लगता था। गाँव के लोग वहीं से अपनी ज़रूरत का सामान खरीदने जाते थे।
पहली मुलाकात
सरस्वतीपुर में रहने वाला एक सीधा-सादा लड़का था — आदित्य।
पढ़ाई पूरी कर चुका था और अपने पिता के काम में हाथ बंटाता था। रोज की तरह वो भी बाजार जाया करता था।
लेकिन एक दिन… सब बदल गया।
वो बाजार की भीड़ में चल रहा था कि अचानक उसकी नजर सामने से आती एक लड़की पर पड़ी। हल्के गुलाबी रंग का सूट, माथे पर छोटी सी बिंदी, और आँखों में एक अजीब सी मासूमियत।
उसका नाम था — नैना।
आदित्य की नजर जैसे वहीं ठहर गई।
कुछ सेकंड… जो शायद सिर्फ दो पल थे… लेकिन उन दो पलों में जैसे वक्त रुक गया।
नैना ने भी महसूस किया कि कोई उसे देख रहा है। उसने धीरे से नजर उठाई… और उनकी आँखें मिलीं।
बस… वही पल था।
ना कोई बात हुई, ना कोई मुस्कान… बस नजरें मिलीं… और कुछ दिल के अंदर उतर गया।
सज-धज कर बाजार जाना
उस दिन के बाद आदित्य के लिए बाजार जाना अब सिर्फ सामान लेने का बहाना नहीं था।
वो अब अच्छे कपड़े पहनकर जाता।
बाल ठीक से बनाता।
इत्र लगाता।
घर वाले हैरान थे — “इतना सज-धज कर कहाँ जा रहा है?”
वो बस मुस्कुरा देता।
असल बात ये थी कि अब उसे किसी का इंतजार रहने लगा था।
रोज का इंतजार
नैना अक्सर अपनी माँ के साथ बाजार आती थी। हाथ में थैला होता, और वो चुपचाप माँ के साथ चलती रहती।
आदित्य उससे दूर खड़ा बस उसे देखता रहता।
जब तक वो बाजार में रहती, उसकी नजरें उसी को ढूंढती रहतीं।
कई बार उसने सोचा कि जाकर बात करे।
लेकिन जैसे ही वो कदम बढ़ाता —
या तो कोई बीच में आ जाता,
या नैना आगे बढ़ जाती।
दोनों के बीच बस नजरों की बातें होती रहीं।
किस्मत का साथ
एक दिन कुछ अलग हुआ।
उस दिन नैना अकेली बाजार आई थी।
आदित्य का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
आज मौका था।
आज शायद बात हो सके।
वो हिम्मत करके उसके पास गया।
दोनों आमने-सामने खड़े थे।
कुछ पल की खामोशी…
और फिर अचानक दोनों एक साथ बोल पड़े —
“मुझे आपसे कुछ कहना है…”
दोनों चौंक गए।
फिर हल्की सी हंसी आई।
आदित्य डर गया। उसे लगा कहीं उसे बुरा तो नहीं लगा कि वो रोज उसे देखता है।
धीरे से उसने कहा —
“आप पहले बोलिए…”
नैना ने झिझकते हुए कहा —
“आप रोज मुझे देखते हैं… क्यों?”
आदित्य का चेहरा लाल हो गया।
कुछ सेकंड की चुप्पी के बाद उसने हिम्मत जुटाई —
“क्योंकि… शायद मुझे आपसे… प्यार हो गया है।”
नैना की आँखों में चमक आ गई।
उसने धीमी आवाज में कहा —
“मुझे भी…”
उस पल जैसे दुनिया रुक गई।
दोनों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि जो एहसास वो पहले दिन से महसूस कर रहे थे… वो दोनों के दिल में एक जैसा था।
दो पल का प्यार… जो सच्चा था
नैना ने बताया कि वो भी रोज सिर्फ इसलिए बाजार आती थी…
क्योंकि उसे उम्मीद रहती थी कि आदित्य दिख जाएगा।
पहले दिन की वो नजर…
वही दो पल…
दोनों के दिल में हमेशा के लिए बस गए थे।
घरवालों की रज़ामंदी
धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ीं।
बातें होने लगीं।
एक-दूसरे को समझने लगे।
कुछ महीनों बाद दोनों ने अपने-अपने घर में बात की।
शुरुआत में थोड़ा संकोच हुआ…
लेकिन जब घरवालों ने देखा कि दोनों का रिश्ता सच्चाई और सम्मान पर टिका है —
तो उन्होंने हाँ कर दी।
और फिर एक दिन… पूरे गाँव की मौजूदगी में…
आदित्य और नैना हमेशा के लिए एक हो गए।
कहानी का संदेश
इस कहानी से बस एक ही बात समझ आती है —
प्यार सालों में नहीं होता।
प्यार एक एहसास है।
एक विश्वास है।
एक सच्ची नजर है।
कभी-कभी सिर्फ दो पल ही काफी होते हैं…
पूरी जिंदगी साथ निभाने के लिए।
