Jhansi Ki Rani Poem in Hindi | झाँसी की रानी कविता | खूब लड़ी मर्दानी – झाँसी की रानी

Jhansi Ki Rani Poem in Hindi | झाँसी की रानी कविता | खूब लड़ी मर्दानी – झाँसी की रानी

झाँसी की रानी कविता भारत की सबसे प्रसिद्ध देशभक्ति कविताओं में से एक है। यह कविता महान कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई थी। इस कविता में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के अद्भुत साहस, वीरता और देशभक्ति का वर्णन किया गया है।

इस कविता की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है —
“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”

यह पंक्ति आज भी भारत के बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के दिल में देशभक्ति की भावना जगाती है। इस लेख में हम आपको Jhansi Ki Rani Poem in Hindi, उसका अर्थ और उससे मिलने वाली सीख के बारे में बताएंगे।

झाँसी की रानी कविता (Jhansi Ki Rani Poem in Hindi)

सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी।

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

चमक उठी सन् सत्तावन में
वह तलवार पुरानी थी।

बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥

कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी।

नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

वीर शिवाजी की गाथाएँ
उसको याद ज़बानी थीं।

बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार।

नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार।

महाराष्ट्र कुल देवी उसकी
भी आराध्य भवानी थी।

बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में।

राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाईं झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावली-सी वह आई झाँसी में।

चित्रा ने अर्जुन को पाया,
शिव से मिली भवानी थी।

बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥

झाँसी की रानी कविता का अर्थ

इस कविता में कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का वर्णन किया है। कविता की शुरुआत में बताया गया है कि जब अंग्रेजों ने भारत पर अत्याचार करना शुरू किया, तब पूरे देश में आज़ादी की भावना जाग उठी।

रानी लक्ष्मीबाई बचपन से ही बहुत साहसी और वीर थीं। उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्ध कला में महारत हासिल थी। जब अंग्रेजों ने झाँसी पर कब्जा करने की कोशिश की, तब रानी ने साहस के साथ उनका सामना किया।

उन्होंने अपने छोटे से बेटे को पीठ पर बाँधकर युद्ध किया और अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ीं। अंत में वे वीरगति को प्राप्त हुईं, लेकिन उनकी वीरता की कहानी आज भी भारत के इतिहास में अमर है।

झाँसी की रानी कविता से मिलने वाली सीख

इस कविता से हमें कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं —

  1. देशभक्ति सबसे बड़ा धर्म है।
  2. साहस और आत्मविश्वास से बड़ी से बड़ी मुश्किल जीती जा सकती है।
  3. महिलाएं भी पुरुषों की तरह वीर और शक्तिशाली हो सकती हैं।
  4. अपने देश की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

निष्कर्ष

झाँसी की रानी कविता केवल एक कविता नहीं बल्कि भारत की वीरता और देशभक्ति की अमर गाथा है। रानी लक्ष्मीबाई ने अपने साहस और बलिदान से यह साबित कर दिया कि सच्चा देशभक्त कभी भी अन्याय के सामने झुकता नहीं है।

आज भी जब हम यह पंक्ति सुनते हैं —

“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी”

तो हमारे अंदर देशभक्ति और साहस की भावना जाग उठती है।

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