Usne Kaha Tha Kahani | उसने कहा था कहानी (पूरी कहानी और सार)

Usne Kaha Tha Kahani | उसने कहा था कहानी (पूरी कहानी और सार)

Usne Kaha Tha Kahani हिंदी साहित्य की बहुत प्रसिद्ध कहानी है। इसे महान लेखक चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने लिखा था। यह कहानी प्रेम, वचन और बलिदान की भावना को बहुत ही मार्मिक तरीके से दिखाती है।

इस कहानी में एक सिख सैनिक लहनासिंह की कहानी है, जो बचपन में एक लड़की से किया हुआ वादा निभाने के लिए अपनी जान तक दे देता है। इसलिए “उसने कहा था” कहानी हिंदी साहित्य की सबसे भावुक और प्रसिद्ध कहानियों में गिनी जाती है।

उसने कहा था कहानी

एक बार अमृतसर के बाज़ार में एक छोटा लड़का और एक छोटी लड़की अक्सर मिलते थे।
लड़का लगभग 12 साल का था और लड़की करीब 8 साल की

दोनों कभी दही वाले के पास मिलते, कभी सब्जी वाले की दुकान पर।

लड़का हर बार मज़ाक में लड़की से पूछता था:

“तेरी कुड़माई हो गई?”
(यानी क्या तुम्हारी सगाई हो गई?)

लड़की हर बार मुस्कुराकर कहती:

“धत्!”
और भाग जाती।

ऐसा कई दिनों तक चलता रहा।

लेकिन एक दिन जब लड़के ने फिर वही सवाल पूछा तो लड़की ने कहा:

“हाँ, हो गई।”

लड़का हैरान होकर बोला:

“कब?”

लड़की ने अपने रेशमी दुपट्टे की तरफ इशारा करके कहा:

“कल। देखते नहीं यह नया सालू?”

यह सुनकर लड़के को बहुत दुख हुआ। वह कुछ बोल नहीं पाया और चुपचाप घर चला गया।

कई साल बाद

समय बीतता गया। लगभग 25 साल गुजर गए

अब वही लड़का बड़ा होकर लहनासिंह नाम का बहादुर सिख सैनिक बन चुका था। वह अंग्रेज़ी सेना की 77 सिख राइफल्स में जमादार था।

उसी समय पहला विश्व युद्ध शुरू हो गया और लहनासिंह को युद्ध के लिए फ्रांस भेज दिया गया।

युद्ध का मैदान

फ्रांस की खाइयों में सिख सैनिक बहुत कठिन हालात में लड़ रहे थे।

ठंड बहुत ज्यादा थी, चारों तरफ कीचड़ था और हर समय गोलियों और बमों की आवाज आती रहती थी।

लहनासिंह अपने साथियों के साथ खाई में डटा हुआ था।
उसके साथ उसके सूबेदार हजारासिंह और उनका बेटा बोधासिंह भी थे।

लहनासिंह बोधासिंह का बहुत ख्याल रखता था।
वह रात में अपना कंबल भी उसे दे देता था और खुद ठंड में पहरा देता था।

दुश्मन की चाल

एक रात एक अंग्रेज़ अफसर की वर्दी पहनकर एक आदमी खाई में आया।

उसने सैनिकों को आदेश दिया कि वे आगे हमला करने जाएँ।

लेकिन लहनासिंह को उस पर शक हुआ।

उसने ध्यान से देखा तो समझ गया कि वह असली अफसर नहीं बल्कि जर्मन जासूस है।

वह खाई को उड़ाने के लिए बम लगा रहा था।

लहनासिंह ने तुरंत हमला करके उसे मार दिया और खाई को बचा लिया।

भयंकर लड़ाई

थोड़ी देर बाद लगभग 70 जर्मन सैनिक खाई पर हमला करने आ गए।

खाई में केवल 8 सिख सैनिक थे।

फिर भी उन्होंने बहादुरी से मुकाबला किया।

उसी समय सूबेदार हजारासिंह अपने सैनिकों के साथ वापस आ गए।

दोनों तरफ से हमला हुआ और जर्मन सैनिक हार गए।

लेकिन इस लड़ाई में कई सैनिक घायल हो गए।

लहनासिंह घायल हो गया

लड़ाई के दौरान लहनासिंह को दो गोलियाँ लगीं।

एक उसकी जांघ में और दूसरी पसली में।

फिर भी उसने किसी को अपनी हालत नहीं बताई।

जब घायल सैनिकों को अस्पताल भेजा जा रहा था, तब भी उसने खुद जाने से मना कर दिया।

उसने कहा:

“पहले सूबेदार और उनके बेटे को ले जाओ।”

बचपन का वादा

जब लहनासिंह की हालत बहुत खराब हो गई तो उसे अचानक अपना बचपन याद आया।

उसे वही लड़की याद आई जिससे वह अमृतसर में मिला था।

बाद में उसे पता चला था कि वह लड़की और कोई नहीं बल्कि सूबेदार हजारासिंह की पत्नी थी।

जब युद्ध शुरू होने से पहले वह उनके घर गया था, तब सूबेदारनी ने उससे कहा था:

“मेरे पति और बेटे का ख्याल रखना।”

लहनासिंह ने उनसे वादा किया था।

और आज उसने वही वादा निभाया था।

अंतिम क्षण

मरते समय लहनासिंह ने अपने साथी से कहा:

“सूबेदारनी को कहना, जो उसने कहा था, वह मैंने कर दिया।”

कुछ देर बाद लहनासिंह ने वहीं दम तोड़ दिया।

कहानी का संदेश

Usne Kaha Tha Kahani हमें कई महत्वपूर्ण बातें सिखाती है:

  • सच्चा प्रेम कभी नहीं भूलता
  • वचन निभाना सबसे बड़ी बात होती है
  • देश के लिए बलिदान सबसे बड़ा धर्म है
  • एक सैनिक की बहादुरी और त्याग महान होता है

निष्कर्ष

“उसने कहा था” हिंदी साहित्य की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक है। यह कहानी प्रेम, कर्तव्य और बलिदान की गहरी भावना को दिखाती है।

लहनासिंह ने बचपन में किया हुआ वादा निभाने के लिए अपनी जान तक दे दी। इसलिए यह कहानी आज भी पाठकों के दिल को छू जाती है।

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