सारे जहाँ से अच्छा लिरिक्स (Sare Jahan Se Achha Lyrics) – पूरा गीत और जानकारी

सारे जहाँ से अच्छा लिरिक्स (Sare Jahan Se Achha Lyrics) – पूरा गीत और जानकारी

“सारे जहाँ से अच्छा” भारत का एक बेहद प्रसिद्ध देशभक्ति गीत है, जिसे सुनते ही हर भारतीय के मन में देश के प्रति गर्व और प्रेम की भावना जाग उठती है। यह गीत सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि भारत की एकता, संस्कृति और गौरव का प्रतीक है। स्कूलों, राष्ट्रीय कार्यक्रमों और खास अवसरों पर यह गीत आज भी पूरे जोश के साथ गाया जाता है।

यह गीत अपनी सरल भाषा, गहरी भावना और देशभक्ति से भरे शब्दों के कारण लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। इस आर्टिकल में हम “सारे जहाँ से अच्छा लिरिक्स” के साथ-साथ इसके इतिहास, रचनाकार और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।

सारे जहाँ से अच्छा क्या है? (What is Sare Jahan Se Achha)

“सारे जहाँ से अच्छा” एक प्रसिद्ध देशभक्ति कविता/गीत है, जिसे महान शायर मोहम्मद इक़बाल (Allama Iqbal) ने लिखा था। यह कविता पहली बार 1904 में प्रकाशित हुई थी और उस समय इसे “तराना-ए-हिंदी” के नाम से जाना जाता था। यह गीत भारत की विविधता, सुंदरता और सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है।

इस गीत को लिखने का मुख्य उद्देश्य भारतीयों में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और उन्हें एकता के सूत्र में बांधना था। उस समय भारत अंग्रेजों के अधीन था, और ऐसे में यह गीत लोगों के लिए प्रेरणा और आत्मविश्वास का स्रोत बना। आज भी यह गीत भारत के सबसे लोकप्रिय देशभक्ति गीतों में से एक है।

सारे जहाँ से अच्छा लिरिक्स (Sare Jahan Se Achha Lyrics)

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥

ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥

ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥

यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥

कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥

‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा॥

इक़बाल

इस गीत का महत्व और खासियत

“सारे जहाँ से अच्छा” सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह गीत हमें हमारी संस्कृति, एकता और देशप्रेम की याद दिलाता है। इसमें भारत की प्राकृतिक सुंदरता, नदियाँ, पर्वत और यहां की विविधता को बहुत खूबसूरती से दर्शाया गया है।

इस गीत की सबसे बड़ी खासियत इसकी पंक्ति “मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” है, जो आज भी समाज को एकता और भाईचारे का संदेश देती है। यही वजह है कि यह गीत पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है और आगे भी इसी तरह प्रेरणा देता रहेगा।

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