एक घने जंगल के किनारे एक पुराना पेड़ था। उस पेड़ पर एक कौआ रहता था और उसी पेड़ की जड़ों के पास एक बिल्ला अपना ठिकाना बनाए हुए था। दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी। वे साथ बैठकर बातें करते, साथ खाना ढूँढते और एक-दूसरे का ख्याल रखते थे। जंगल के बाकी जानवर भी उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे।
एक दिन सुबह का समय था। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। कौआ पेड़ की ऊँची टहनी पर बैठा था और बिल्ला नीचे आराम कर रहा था। तभी अचानक झाड़ियों में सरसराहट हुई। दोनों ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन कुछ ही पल में एक बड़ा और खतरनाक चीता वहाँ आ गया।
चीते को देखते ही कौआ तुरंत उड़कर पेड़ की ऊँची डाल पर जा बैठा। लेकिन बिल्ले को भागने का मौका ही नहीं मिला। वह डर के मारे कांपने लगा। चीता धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा था।
बिल्ले ने डरते हुए ऊपर देखा और बोला,
“दोस्त, अगर तुम मेरी मदद नहीं करोगे तो आज मेरी जान नहीं बचेगी।”
कौआ समझदार था। उसने तुरंत सोचना शुरू किया। तभी उसे दूर से कुछ चरवाहे और उनके शिकारी कुत्ते आते दिखे। उसके दिमाग में एक योजना आ गई।
कौआ तेज आवाज में काँव-काँव करता हुआ चरवाहों की तरफ उड़ गया। उसने उनके सामने जमीन पर चोंच मार-मार कर मिट्टी उड़ाई ताकि उनका ध्यान उसकी तरफ जाए। फिर वह एक कुत्ते के बहुत पास जाकर उड़ने लगा। कुत्ता उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ पड़ा।
कौआ जानबूझकर कुत्ते को अपने पीछे-पीछे उस जगह तक ले आया जहाँ चीता खड़ा था। जैसे ही कुत्तों ने चीते को देखा, वे जोर से भौंकते हुए उसकी तरफ दौड़ पड़े। चरवाहे भी डंडे लेकर पीछे आ गए।
इतने सारे कुत्तों और इंसानों को देखकर चीता डर गया और तुरंत वहाँ से भाग गया।
जैसे ही खतरा टला, कौआ वापस अपने दोस्त के पास आया। बिल्ला अभी भी डर से कांप रहा था, लेकिन वह सुरक्षित था।
बिल्ले ने भावुक होकर कहा,
“दोस्त, आज तुमने मेरी जान बचा ली। मैं तुम्हारा यह एहसान कभी नहीं भूलूँगा।”
कौआ मुस्कुराते हुए बोला,
“सच्चे दोस्त वही होते हैं जो मुश्किल समय में साथ दें।”
उस दिन के बाद उनकी दोस्ती और भी मजबूत हो गई। दोनों हमेशा एक-दूसरे का ध्यान रखते और खुशी से रहने लगे।
समय बीतता गया और उनकी दोस्ती की कहानी पूरे जंगल में मशहूर हो गई। बाकी जानवर भी उनसे सीखने लगे कि सच्ची दोस्ती क्या होती है।
सीख:
सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत में साथ खड़ा रहे।
समझदारी और हिम्मत से बड़ी से बड़ी परेशानी को हराया जा सकता है।
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