कौवों की गिनती:-
राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में हमेशा नए-नए सवाल पूछकर मज़ा लेते थे। वे अक्सर तेनालीराम से ऐसे सवाल पूछते, जिनका जवाब देना किसी के लिए भी मुश्किल लगता। लेकिन तेनालीराम भी हर बार अपनी बुद्धि और चतुराई से राजा को हैरान कर देते थे।
एक दिन राजा ने तेनालीराम से मुस्कुराते हुए पूछा,
“तेनालीराम, क्या तुम मेरे राज्य में रहने वाले कौवों की संख्या बता सकते हो?”
तेनालीराम ने साहसपूर्वक उत्तर दिया,
“जी महाराज, बिल्कुल बता सकता हूँ।”
राजा गंभीर स्वर में बोले,
“मैं तुम्हें सही-सही संख्या पूछ रहा हूँ। अंदाज़ा नहीं चलेगा। यदि तुमने गलत उत्तर दिया, तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जाएगा।”
तेनालीराम ने शांत होकर कहा,
“महाराज, मैं आपका हुक्म स्वीकार करता हूँ। भरोसा रखिए, मैं कौवों की सही संख्या ही बताऊँगा।”
राजा के सवाल ने दरबार में हलचल मचा दी। तेनालीराम के विरोधी अंदर ही अंदर खुश हो गए। वे सोचने लगे,
“अब तो तेनालीराम फँस गया। ये कौवों की गिनती कैसे कर सकता है? कोई इंसान इतना धैर्य और समय कैसे निकाल सकता है?”
राजा कृष्णदेवराय ने तेनालीराम की ओर देखकर उत्तर माँगा। तेनालीराम ने पूरी गंभीरता से कहा,
“महाराज, हमारे राज्य में कुल एक लाख बीस हज़ार पांच सौ पचास कौवे हैं।”
राजा थोड़े चकित होकर बोले,
“क्या सच में हमारे राज्य में इतने कौवे हैं?”
तेनालीराम मुस्कुराते हुए बोले,
“महाराज, यदि आपको विश्वास न हो, तो आप गिनवा कर देख सकते हैं। मैं केवल सत्य ही कह रहा हूँ।”
राजा ने फिर पूछा,
“अगर गिनती में कुछ कम या ज्यादा हो जाए तो?”
तेनालीराम ने धैर्यपूर्वक उत्तर दिया,
“महाराज, ऐसा हो ही नहीं सकता। अगर ऐसा भी हुआ, तो उसका कारण यह होगा कि कुछ कौवे अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्य चले गए होंगे, या फिर दूसरे राज्य के कुछ कौवे हमारे राज्य में आए होंगे। इस स्थिति में संख्या थोड़ी कम या ज्यादा दिख सकती है, लेकिन मूल संख्या वही रहेगी।”
राजा कृष्णदेवराय तेनालीराम की बात सुनकर मुस्कुराने लगे और उनके विरोधी बेचारे निरुत्तर रह गए। दरबार में सबने तेनालीराम की बुद्धिमानी और तर्कशक्ति को सराहा।
इस कहानी से यह सिद्ध होता है कि तेनालीराम अपनी चतुराई और समझदारी से हर मुश्किल सवाल का हल निकाल सकते थे, और उनका जवाब हमेशा इतना सही और बुद्धिमान होता था कि कोई भी विरोधी उन्हें मात नहीं दे पाता।
राजा कृष्णदेवराय ने तेनालीराम की ओर देखकर कहा,
“तेनालीराम, तुम्हारी बुद्धि सचमुच अद्भुत है। तुम हर बार मेरी परीक्षा पास कर जाते हो।”
और इस तरह तेनालीराम ने एक बार फिर अपनी तेज बुद्धि और सूझ-बूझ से दरबार में अपनी जगह को साबित किया और साबित कर दिया कि कठिन सवालों में भी बुद्धिमानी का जवाब हमेशा सबसे मजबूत होता है।
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