शेर का अपहरण – एक रोमांचक जंगल की कहानी

शेर का अपहरण – एक रोमांचक जंगल की कहानी

सुन्दरवन नाम का एक घना और सुंदर जंगल था। उस जंगल में सभी जानवर मिलजुल कर रहते थे। वहाँ का राजा था एक ताकतवर लेकिन दयालु शेर — जिसका नाम था मंगल

मंगल सिर्फ नाम का राजा नहीं था, वह दिल से भी बड़ा था। वह कभी अपने जंगल के जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचाता था। शिकार करने के लिए भी वह दूसरे जंगल में जाता था। इसी कारण सभी जानवर उसका बहुत सम्मान करते थे।

एक रात मंगल अपनी गुफा के बाहर सो रहा था। ठंडी हवा चल रही थी और पूरा जंगल गहरी नींद में था। तभी अचानक मंगल की नाक में मांस की खुशबू आई।

उसने आँखें खोलीं और देखा — उसकी गुफा से थोड़ी दूर ताजा मांस का बड़ा टुकड़ा रखा था।

मंगल को भूख लगी थी। उसने सोचा, “शायद कोई जानवर यहाँ छोड़ गया होगा।”
वह धीरे-धीरे उस मांस के पास पहुँचा और खाने लगा।

लेकिन तभी…

धड़ाम!!!

ऊपर से लोहे का भारी पिंजरा उसके ऊपर गिर गया।

मंगल समझ गया — यह शिकारियों की चाल थी।

वह जोर से दहाड़ने ही वाला था कि तभी एक शिकारी ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। कुछ ही पल में मंगल बेहोश हो गया।

शिकारियों ने उसे बड़े ट्रक में डाला और शहर ले गए। वहाँ उन्होंने उसे एक सरकस में बेच दिया।

जब मंगल को होश आया, तो उसने खुद को लोहे के पिंजरे में कैद पाया। आसपास और भी शेर थे।

मंगल ने एक शेर से पूछा,
“भाई, तुम कब से यहाँ हो?”

वह उदास होकर बोला,
“कई साल हो गए। यहाँ हमें लोगों के सामने करतब दिखाने पड़ते हैं। अगर नहीं दिखाएँ तो खाना नहीं मिलता।”

मंगल को यह सब बहुत बुरा लगा।

अगले दिन एक रिंग मास्टर आया। उसने मंगल को हंटर दिखाया और करतब सिखाने लगा।

मंगल ने उसकी तरफ देखा… और जोर से दहाड़ मारी।

रिंग मास्टर डरकर भाग गया।

इससे गुस्से में आकर सरकस मालिक ने मंगल का खाना-पानी बंद कर दिया।

दिन बीतते गए। मंगल कमजोर होने लगा। उसकी आँखों की चमक कम हो गई।

इधर सुन्दरवन में जब पता चला कि राजा मंगल का अपहरण हो गया है, तो पूरे जंगल में हड़कंप मच गया।

भोलू हाथी ने सभी जानवरों को इकट्ठा किया।

“हमें अपने राजा को वापस लाना होगा!” उसने दृढ़ आवाज में कहा।

मीना लोमड़ी बोली,
“पहले यह पता लगाना होगा कि वे कहाँ हैं।”

तभी एक हिरण बोला,
“यह काम चिंटू बंदर कर सकता है। वह शहर में आसानी से जा सकता है।”

चिंटू बंदर आगे आया,
“आप सब तैयारी करो। मैं अभी शहर जाता हूँ।”

चिंटू शहर पहुँचा। उसने पहले चिड़ियाघर देखा, लेकिन मंगल वहाँ नहीं था।

फिर वह सरकस पहुँचा।

वह धीरे-धीरे पिंजरों के पास गया। उसने देखा — एक शेर कोने में उदास पड़ा था।

तभी उसने दो शेरों को बात करते सुना:

“यह सुंदरवन का शेर मूर्ख है। इसे लगता है कि यह यहाँ से भाग जाएगा।”

चिंटू समझ गया — यह हमारे राजा मंगल हैं।

रात को जब सब सो गए, चिंटू चुपचाप मंगल के पास पहुँचा।

“महाराज, मैं हूँ चिंटू। हम आपको लेने आएँगे।”

मंगल की आँखों में आशा की चमक लौट आई।

चिंटू जंगल लौटा और सबको खबर दी।

भोलू हाथी ने योजना बनाई:

  • सबसे आगे हाथियों का दल रहेगा
  • फिर लोमड़ी और गीदड़
  • चिंटू पेड़ों पर आगे-आगे चलेगा
  • कुछ जानवर जंगल की रखवाली करेंगे

सबने हामी भरी।

अगली रात सभी जानवर शहर पहुँचे।

सरकस के चौकीदार ने सीटी बजाने की कोशिश की, लेकिन चिंटू ने झपट कर सीटी छीन ली।

हाथियों ने पिंजरे का दरवाजा तोड़ दिया।

सभी शेर बाहर आ गए।

एक शेर बोला,
“मंगल भाई, हमें भी साथ ले चलो।”

मंगल ने कहा,
“एक शर्त पर — तुम किसी भी निर्दोष जानवर को नुकसान नहीं पहुँचाओगे।”

सभी ने वादा किया।

सरकस मालिक घुटनों पर बैठ गया।
“हमें माफ कर दो।”

मंगल बोला,
“आज के बाद कोई जानवर यहाँ काम नहीं करेगा।”

सभी जानवर खुशी-खुशी अपने राजा के साथ जंगल लौट आए।

सुन्दरवन में फिर से खुशियाँ लौट आईं।

मंगल ने समझ लिया था —
ताकत से ज्यादा जरूरी है साथ और समझदारी।

कहानी से सीख

  • एकता में बहुत शक्ति होती है।
  • सच्चा नेता वही है जो दूसरों की चिंता करे।
  • मिलकर काम करने से बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान हो जाती है।

मुख्य पेज – शेर की कहानी in Hindi

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top