Rabindranath Tagore – रबीन्द्रनाथ टैगोर | जीवन, रचनाएँ, कहानियाँ, उपन्यास और नाटक

Rabindranath Tagore – रबीन्द्रनाथ टैगोर | जीवन, रचनाएँ, कहानियाँ, उपन्यास और नाटक

रवीन्द्रनाथ ठाकुर (Rabindranath Tagore), जिन्हें गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर के नाम से जाना जाता है, आधुनिक भारतीय साहित्य के सबसे महान रचनाकारों में से एक थे। वे केवल कवि ही नहीं बल्कि उपन्यासकार, नाटककार, चित्रकार, संगीतकार और दार्शनिक भी थे।

वे ऐसे पहले गैर-यूरोपीय लेखक थे जिन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्व के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों के राष्ट्रगान बनीं —

🇮🇳 “जन गण मन” (भारत)
🇧🇩 “आमार सोनार बाँग्ला” (बांग्लादेश)

रबीन्द्रनाथ टैगोर की साहित्यिक विशेषताएँ

टैगोर की रचनाओं में

  • मानवीय भावनाएँ
  • प्रेम और करुणा
  • नारी चेतना
  • सामाजिक बंधन
  • आत्मा की स्वतंत्रता
  • आध्यात्मिकता

को गहराई से उकेरा गया है। उनकी रचनाएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के प्रसिद्ध उपन्यास

उपन्यासविषय
गोराराष्ट्रवाद और समाज
घरे-बाइरेप्रेम, राजनीति
चोखेर बालीस्त्री मनोविज्ञान
नष्टनीड़टूटता हुआ परिवार
योगायोगविवाह और समाज
राजर्षिधर्म और मानवता
दो बहनेंरिश्तों की गहराई

रबीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियाँ

टैगोर की कहानियाँ भारतीय कहानी साहित्य की नींव हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कहानियाँ:

  • काबुलीवाला
  • पोस्टमास्टर
  • अपरिचिता
  • अतिथि
  • अनमोल भेंट
  • दहेज
  • पत्नी का पत्र
  • विदा
  • समाज का शिकार
  • स्वर्ण मृग
  • जीवित और मृत
  • तोता
  • भिखारिन
  • गूंगी (सुभा)
  • नई रोशनी

इन कहानियों में समाज, स्त्री जीवन, प्रेम, त्याग और संघर्ष की सशक्त झलक मिलती है।

रबीन्द्रनाथ टैगोर के प्रसिद्ध नाटक

नाटकविशेषता
डाकघरमानव आत्मा की मुक्ति
रक्तकरबीपूंजीवाद विरोध
राजाआध्यात्मिक दर्शन
मुक्तधारासामाजिक विद्रोह
विसर्जनबलिदान
अचलायतनरूढ़ियों का विरोध
वाल्मीकि प्रतिभाआत्मबोध

कविता संग्रह

  • गीतांजलि (नोबेल पुरस्कार दिलाने वाली रचना)
  • सोनार तरी
  • मानसी
  • गीतिमाल्य
  • वलाका
  • भानुसिंह ठाकुरेर पदावली

संस्मरण व गद्य

  • जीवनस्मृति
  • छेलेबेला
  • रूस के पत्र

इनमें टैगोर के जीवन, विचार और यात्रा का अनूठा चित्र मिलता है।

रबीन्द्रनाथ टैगोर का विश्व प्रभाव

टैगोर की रचनाएँ दुनिया की 50+ भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। वे महात्मा गांधी के समकालीन थे और दोनों के बीच गहरी बौद्धिक मित्रता थी।

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