अकबर का साला : अकबर-बीरबल की कहानी (Akbar Ka Sala)
बात उस समय की है जब दिल्ली पर बादशाह अकबर राज करते थे। अकबर के दरबार में बीरबल सबसे समझदार […]
बात उस समय की है जब दिल्ली पर बादशाह अकबर राज करते थे। अकबर के दरबार में बीरबल सबसे समझदार […]
बहुत समय पहले की बात है। एक घना-सा जंगल था, जहाँ तरह-तरह के जानवर रहते थे। उसी जंगल में एक
अगर हम पुराने ज़माने की बात करें, तो उस दौर में न तो एलोपैथिक डॉक्टर होते थे और न ही
हीरों का सच:-एक दिन राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में मंत्रियों के साथ राज्य के कार्यों पर विचार-विमर्श कर रहे थे।
अच्छा, तू माँ से भी मजाक करेगा-यह बात आज से लगभग छह सौ साल पुरानी है। उस समय दक्षिण भारत
गौतम बुद्ध (563 ईसा पूर्व–483 ईसा पूर्व) को महात्मा बुद्ध, भगवान बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम और शाक्यमुनि के नाम से भी
कौवों की गिनती:-राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में हमेशा नए-नए सवाल पूछकर मज़ा लेते थे। वे अक्सर तेनालीराम से ऐसे सवाल
रंग-बिरंगे नाखून:-राजा कृष्णदेव राय को पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। उन्हें नए-नए और सुंदर पक्षियों को देखना बहुत अच्छा लगता
नीलकेतु और तेनालीराम:-एक बार विजयनगर के राजदरबार में एक अनजान यात्री आया। उसका नाम नीलकेतु था। वह बहुत दुबला-पतला और
इस्मत चुग़ताई (21 अगस्त 1915 – 24 अक्टूबर 1991) उर्दू साहित्य की सबसे प्रभावशाली, निर्भीक और चर्चित लेखिकाओं में गिनी