अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना (रहीम) हिंदी साहित्य के महान कवियों में से एक माने जाते हैं। उनके दोहे सरल भाषा में होते हैं, लेकिन उनमें जीवन की गहरी सीख छिपी होती है। ऐसा ही एक बहुत प्रसिद्ध दोहा है — “रहिमन धागा प्रेम का…”, जो प्रेम और रिश्तों की नाजुकता को बहुत सुंदर तरीके से समझाता है।
दोहा
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर न मिले, मिले गाँठ परिजाय॥
अर्थ (सरल भाषा में)
रहीम जी कहते हैं कि प्रेम का रिश्ता एक धागे की तरह होता है—बहुत ही नाजुक और कोमल। इसे झटके से तोड़ना या खत्म करना सही नहीं होता। अगर यह धागा एक बार टूट जाए, तो उसे फिर से जोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। और अगर किसी तरह जोड़ भी दिया जाए, तो उसमें गांठ पड़ जाती है, यानी पहले जैसी सहजता और मिठास नहीं रहती।
विस्तार से समझें
यह दोहा हमें जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक—रिश्तों—के बारे में सिखाता है। रहीम ने प्रेम को “धागा” कहा है, क्योंकि जैसे एक पतला धागा थोड़ी सी खींच या झटके से टूट सकता है, वैसे ही प्रेम और विश्वास भी बहुत नाजुक होते हैं।
आज के समय में अक्सर देखा जाता है कि लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ देते हैं। गुस्से में आकर, बिना सोचे-समझे ऐसे शब्द बोल देते हैं जो सामने वाले के दिल को चोट पहुँचा देते हैं। उस समय तो हमें लगता है कि हम सही हैं, लेकिन बाद में जब रिश्ता टूट जाता है, तब उसकी अहमियत समझ में आती है।
रहीम जी हमें यही समझाना चाहते हैं कि हमें अपने रिश्तों को संभालकर रखना चाहिए। अगर कभी किसी से मनमुटाव हो भी जाए, तो उसे बातचीत और समझदारी से सुलझाना चाहिए, न कि उसे तोड़ देना चाहिए।
“गाँठ” का मतलब क्या है?
दोहा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है—“मिले गाँठ परिजाय”। इसका मतलब है कि अगर टूटे हुए रिश्ते को फिर से जोड़ भी लिया जाए, तो उसमें पहले जैसी सादगी और विश्वास नहीं रहता। जैसे धागा टूटने के बाद जब हम उसे जोड़ते हैं, तो उसमें गांठ पड़ जाती है, उसी तरह रिश्तों में भी एक दूरी या खटास रह जाती है।
यह “गाँठ” विश्वास की कमी, पुरानी बातें याद आना, या मन में छिपी नाराजगी के रूप में हो सकती है। इसलिए बेहतर यही है कि हम रिश्तों को टूटने ही न दें।
आज के जीवन में महत्व
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपने रिश्तों को समय नहीं दे पाते। सोशल मीडिया, काम का दबाव और निजी अहंकार (ego) के कारण रिश्तों में दूरी आ जाती है। ऐसे में रहीम का यह दोहा हमें याद दिलाता है कि:
- रिश्ते बहुत कीमती होते हैं
- उन्हें संभालकर रखना चाहिए
- गुस्से और अहंकार में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए
- माफ करना और समझना सीखना चाहिए
अगर हम इन बातों का ध्यान रखें, तो हमारे रिश्ते मजबूत और लंबे समय तक चल सकते हैं।
निष्कर्ष
“रहिमन धागा प्रेम का” केवल एक दोहा नहीं, बल्कि जीवन की एक बड़ी सीख है। यह हमें सिखाता है कि प्रेम और विश्वास को बनाए रखना कितना जरूरी है। रिश्तों को तोड़ना आसान है, लेकिन उन्हें निभाना ही असली समझदारी है।
इसलिए हमें हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए कि हम अपने रिश्तों को प्यार, धैर्य और समझदारी से संभालकर रखें, ताकि उनमें कभी “गाँठ” न पड़े।
