Brihaspativar Vrat Katha | श्री बृहस्पति देव जी की सम्पूर्ण कथा, विधि और महत्व

Brihaspativar Vrat Katha | श्री बृहस्पति देव जी की सम्पूर्ण कथा, विधि और महत्व

हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति (देव गुरु) को समर्पित होता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से धन, संतान, सुख-समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और नियम से बृहस्पतिवार व्रत कथा सुनने और पढ़ने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। भारतवर्ष में एक बहुत ही दानी और प्रतापी राजा राज्य करता था। वह प्रतिदिन गरीबों और ब्राह्मणों को दान देता था, लेकिन उसकी रानी को यह सब पसंद नहीं था। वह न तो दान करती थी और न ही भगवान की पूजा करती थी।

एक दिन राजा शिकार पर गए हुए थे। उसी समय बृहस्पति देव साधु का रूप धारण कर महल में आए और भिक्षा मांगी। रानी ने भिक्षा देने से इंकार कर दिया और कहा कि वह दान से परेशान है और चाहती है कि उसका सारा धन नष्ट हो जाए।

साधु (बृहस्पति देव) ने उसे समझाया कि धन का उपयोग अच्छे कार्यों में करना चाहिए—जैसे भूखों को भोजन, गरीबों की सहायता, कन्याओं का विवाह आदि। लेकिन रानी ने उनकी बात नहीं मानी।

तब साधु ने कहा: “यदि तुम ऐसा ही चाहती हो तो गुरुवार के दिन गलत तरीके से कार्य करो—घर लीपो, सिर धोओ, कपड़े धोओ—तुम्हारा धन नष्ट हो जाएगा।”

रानी ने वैसा ही किया और केवल तीन गुरुवार में ही उसका सारा धन समाप्त हो गया।

दुख और कष्ट का समय

राजा परदेश चला गया और लकड़हारा बनकर जीवन बिताने लगा। रानी और दासी भूखे रहने लगीं। एक दिन रानी ने अपनी बहन से मदद मांगी।

रानी की बहन उस समय बृहस्पतिवार व्रत कथा सुन रही थी, इसलिए वह तुरंत बात नहीं कर पाई। बाद में उसने रानी को व्रत की विधि बताई।

व्रत की शुरुआत

रानी और दासी ने गुरुवार का व्रत शुरू किया:

  • चने की दाल और मुनक्का से पूजा
  • केले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु की आराधना
  • पीले भोजन का सेवन

भगवान बृहस्पति प्रसन्न हुए और उन्हें भोजन तथा धन प्राप्त होने लगा।

जीवन में सुधार

धीरे-धीरे रानी का जीवन सुधर गया। उसने दान-पुण्य करना शुरू किया और उसका यश फैल गया। राजा ने भी बृहस्पति व्रत करना शुरू किया।

एक दिन राजा को फिर कष्ट मिला क्योंकि उसने व्रत भूल किया था। लेकिन बाद में फिर से श्रद्धा से व्रत करने पर उसके सभी कष्ट दूर हो गए।

सुख-समृद्धि की प्राप्ति

भगवान बृहस्पति की कृपा से:

  • राजा को अपना राज्य वापस मिला
  • धन-संपत्ति बढ़ी
  • संतान की प्राप्ति हुई
  • परिवार में सुख-शांति आई

दूसरी कथा (संक्षेप में)

एक गरीब ब्राह्मण की बेटी हर गुरुवार व्रत करती थी। वह रास्ते में जौ डालती थी जो सोने में बदल जाते थे। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान बृहस्पति ने उसे धन, सुख और अच्छा विवाह दिया।

बाद में उसने अपनी माँ को भी व्रत करना सिखाया, जिससे उनकी गरीबी दूर हो गई।

बृहस्पतिवार व्रत विधि

गुरुवार के दिन यह विधि अपनाएं:

  • सुबह स्नान करके पीले वस्त्र पहनें
  • भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें
  • केले के पेड़ की पूजा करें
  • चना दाल, गुड़, मुनक्का अर्पित करें
  • व्रत कथा सुनें या पढ़ें
  • केवल पीला भोजन करें
  • प्रसाद बांटें

व्रत का महत्व

बृहस्पतिवार व्रत करने से:

  • धन और समृद्धि मिलती है
  • विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं
  • संतान सुख प्राप्त होता है
  • घर में सुख-शांति बनी रहती है
  • गुरु ग्रह मजबूत होता है

निष्कर्ष

बृहस्पतिवार व्रत कथा हमें यह सिखाती है कि अहंकार, आलस्य और दान न करने से जीवन में कष्ट आते हैं, जबकि श्रद्धा, सेवा और भक्ति से भगवान प्रसन्न होकर जीवन को सुखमय बना देते हैं।

जयकारा

॥ बोलो बृहस्पति देव की जय ॥
॥ भगवान विष्णु की जय ॥

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