दादी माँ के घरेलू नुस्खे
अगर हम पुराने ज़माने की बात करें, तो उस दौर में न तो एलोपैथिक डॉक्टर होते थे और न ही […]
अगर हम पुराने ज़माने की बात करें, तो उस दौर में न तो एलोपैथिक डॉक्टर होते थे और न ही […]
हीरों का सच:-एक दिन राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में मंत्रियों के साथ राज्य के कार्यों पर विचार-विमर्श कर रहे थे।
अच्छा, तू माँ से भी मजाक करेगा-यह बात आज से लगभग छह सौ साल पुरानी है। उस समय दक्षिण भारत
तेनालीराम भारत के सबसे प्रसिद्ध बुद्धिमान, हास्यप्रिय और चतुर व्यक्तियों में से एक थे। वे केवल मज़ाकिया व्यक्ति ही नहीं,
गौतम बुद्ध (563 ईसा पूर्व–483 ईसा पूर्व) को महात्मा बुद्ध, भगवान बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम और शाक्यमुनि के नाम से भी
कौवों की गिनती:-राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में हमेशा नए-नए सवाल पूछकर मज़ा लेते थे। वे अक्सर तेनालीराम से ऐसे सवाल
रंग-बिरंगे नाखून:-राजा कृष्णदेव राय को पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। उन्हें नए-नए और सुंदर पक्षियों को देखना बहुत अच्छा लगता
नीलकेतु और तेनालीराम:-एक बार विजयनगर के राजदरबार में एक अनजान यात्री आया। उसका नाम नीलकेतु था। वह बहुत दुबला-पतला और
इस्मत चुग़ताई (21 अगस्त 1915 – 24 अक्टूबर 1991) उर्दू साहित्य की सबसे प्रभावशाली, निर्भीक और चर्चित लेखिकाओं में गिनी
मुंशी प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू साहित्य का वह नाम हैं, जिनके बिना भारतीय साहित्य की कल्पना अधूरी लगती है। उन्होंने