पड़ोसी राजा : तेनालीराम की बुद्धिमानी भरी कहानी
पड़ोसी राजा:-विजयनगर राज्य उस समय भारत के सबसे समृद्ध और शक्तिशाली राज्यों में गिना जाता था। राजा कृष्णदेव राय अपने […]
पड़ोसी राजा:-विजयनगर राज्य उस समय भारत के सबसे समृद्ध और शक्तिशाली राज्यों में गिना जाता था। राजा कृष्णदेव राय अपने […]
अन्तिम इच्छा:-विजयनगर के दरबार में कई ब्राह्मण ऐसे थे जो लालच और स्वार्थ के लिए जाने जाते थे। वे हमेशा
ब्राह्मण किसकी पूजा करे:-एक दिन विजयनगर के राजदरबार में असाधारण शांति थी। न तो किसी प्रजा की शिकायत आई थी
हीरों का सच:-एक दिन राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में मंत्रियों के साथ राज्य के कार्यों पर विचार-विमर्श कर रहे थे।
अच्छा, तू माँ से भी मजाक करेगा-यह बात आज से लगभग छह सौ साल पुरानी है। उस समय दक्षिण भारत
तेनालीराम भारत के सबसे प्रसिद्ध बुद्धिमान, हास्यप्रिय और चतुर व्यक्तियों में से एक थे। वे केवल मज़ाकिया व्यक्ति ही नहीं,
कौवों की गिनती:-राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में हमेशा नए-नए सवाल पूछकर मज़ा लेते थे। वे अक्सर तेनालीराम से ऐसे सवाल
रंग-बिरंगे नाखून:-राजा कृष्णदेव राय को पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। उन्हें नए-नए और सुंदर पक्षियों को देखना बहुत अच्छा लगता
नीलकेतु और तेनालीराम:-एक बार विजयनगर के राजदरबार में एक अनजान यात्री आया। उसका नाम नीलकेतु था। वह बहुत दुबला-पतला और
दक्षिण भारत की पुरानी लोककथाओं में एक नाम ऐसा है, जो चाहे जितनी बार सुन लो, कभी पुराना नहीं लगता—