इस्लाम धर्म में “कलमा” बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अक्सर लोग पूछते हैं – कलमा क्या होता है? और इस्लाम में कुल कितने कलमे हैं?
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कलमा का अर्थ क्या होता है और इस्लाम में इसका क्या महत्व है। साथ ही हम समझेंगे कि इस्लाम में कुल कितने कलमे माने जाते हैं और 6 kalma in hindi को सरल भाषा में कैसे समझा जा सकता है। इसके अलावा हम 3 kalma in hindi और 4 kalma in hindi के बारे में भी चर्चा करेंगे, ताकि जिन्हें कम संख्या में कलमे याद करने हैं उन्हें भी स्पष्ट जानकारी मिल सके। विशेष रूप से dusra kalma in hindi को भी आसान शब्दों में समझाया जाएगा। अंत में हर एक कलमे का सरल हिंदी अनुवाद और उसका अर्थ विस्तार से समझाया जाएगा, ताकि पाठकों को पूरी और स्पष्ट जानकारी मिल सके।
कलमा क्या होता है? (Kalma Kya Hota Hai)
“कलमा” अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है – वचन या विश्वास का कथन।
इस्लाम में कलमा से तात्पर्य उन शब्दों से है जिनमें इस्लाम के मूल सिद्धांतों और आस्था को संक्षेप में बताया गया है।
सबसे मुख्य कलमा वह है जिसमें यह गवाही दी जाती है कि:
- अल्लाह एक है
- और हज़रत मुहम्मद ﷺ उनके रसूल हैं
इस्लाम में कुल कितने कलमे हैं?
इस्लाम में आमतौर पर कुल 6 कलमे बताए जाते हैं।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- कलमा तय्यबा
- कलमा शहादत
बाकी कलमे भी ईमान, तौहीद (एकेश्वरवाद), तौबा और अल्लाह की महानता को दर्शाते हैं।
6 Kalma in Hindi (छह कलमे हिंदी में)
आइये हम अच्छे से सारे 6 के 6 कलमों को सही से और उनके मायनो के साथ पढ़ते और समझते है ;
पहला कलमा – कलमा तय्यबा
अरबी:
لَآ اِلٰهَ اِلَّااللهُ مُحَمَّدٌ رَّسُولُ اللہِ
उच्चारण:
ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह
हिंदी अर्थ:
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, और हज़रत मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं।
यह इस्लाम की बुनियाद है।
दूसरा कलमा – कलमा शहादत (Dusra Kalma in Hindi)
अरबी:
اَشْهَدُ اَنْ لَّآ اِلٰهَ اِلَّا اللهُ وَحْدَہٗ لَاشَرِيْكَ لَہٗ وَاَشْهَدُ اَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهٗ وَرَسُولُہٗ
उच्चारण:
अश-हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, व अश-हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहु।
हिंदी अर्थ (सरल भाषा में):
मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। वह अकेला है और उसका कोई साझीदार नहीं। और मैं गवाही देता हूँ कि हज़रत मुहम्मद ﷺ अल्लाह के बंदे और रसूल हैं।
इसमें ईमान की गवाही दी जाती है।
तीसरा कलमा – कलमा तमजीद
अरबी:
سُبْحَان اللهِ وَالْحَمْدُلِلّهِ وَلا إِلهَ إِلّااللّهُ وَاللّهُ أكْبَرُ
उच्चारण:
सुब्हानल्लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि व ला इला-ह इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, व ला हौल व ला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम।
हिंदी अर्थ:
अल्लाह पाक है, सारी तारीफ उसी के लिए है, उसके सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं और अल्लाह सबसे बड़ा है।
यह कलमा अल्लाह की महानता और पवित्रता बयान करता है।
चौथा कलमा – कलमा तौहीद
अरबी:
لَآ اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهٗ لا شَرِيْكَ لَهٗ له الْمُلْكُ وله الْحَمْدُ يُحْىٖ وَيُمِيْتُ وَهُوَ حَئٌّ لا يَمُوْتُ اَبَدًا اَبَدًاؕ ذُوالْجَلَالِ وَالْاِكْرَامِؕ بيده الْخَيْرُ وهو عَلٰى كُلِّ شَىْءٍ قَدِیْرٌ ؕ
उच्चारण:
ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहूल मुल्कु व लाहूल हम्दु युह्यी वयुमीतु वहुवा हय्युल ला यमूतु अबदन अबदा, जुल जलालिल वल इकराम, बियादिहिल खैरू वहुवा अला कुल्ली शैइन कदीर।
हिंदी अर्थ (सरल रूप में):
अल्लाह एक है, उसका कोई साझीदार नहीं। सारी बादशाहत उसी की है। वही जीवन देता है और वही मृत्यु देता है। वह हमेशा रहने वाला है और हर चीज़ पर काबू रखने वाला है।
यह कलमा एकेश्वरवाद (तौहीद) की शिक्षा देता है।
पाँचवाँ कलमा – कलमा इस्तिग़फ़ार
अरबी:
أَسْتَغْفِرُ اللهَ رَبِّي مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ أَذْنَبْتُهُ عَمَدًا أَوْ خَطَأً سِرًّا أَوْ عَلَانِيَةً وَأَتُوبُ إِلَيْهِ مِنَ الذَّنْبِ الَّذِي أَعْلَمُ وَمِنَ الذَّنْبِ الَّذِي لَا أَعْلَمُ إِنَّكَ أَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ وَسَتَّارُ الْعُيُوبِ وَغَفَّارُ الذُّنُوبِ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ
उच्चारण:
अस्तग़फिरुल्ला-ह रब्बी मिन कुल्लि धम्बिन अज़़नब्तुहू ‘अमदन औ ख़त-अन सिर्रन औ ‘अलानिय-त-व व-अतूबु इलैहि मिन-अज़ धम्बिल लज़ी अ’अलमु वमिन-अज़ धम्बिल लज़ी ला अ’अलमु इन्नका अंता ‘अल्लामुल ग़ुयूबि व सत्त़ारुल ‘युूबि व ग़फ्फारुज़ धुनूबि वला हौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाहिल ‘अलिय्यिल ‘अज़ीम.
हिंदी अर्थ:
मैं अल्लाह से अपने सभी गुनाहों की माफी मांगता हूँ — चाहे वे जानबूझकर किए हों या गलती से, छुपकर या खुलेआम। ऐ अल्लाह! तू सब जानने वाला और गुनाह माफ करने वाला है।
यह कलमा तौबा (पश्चाताप) और माफी की दुआ है।
छठा कलमा – कलमा रद्दे कुफ्र
अरबी:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ أَنْ أُشْرِكَ بِكَ شَيْئًا وَأَنَا أَعْلَمُ بِهِ، وَأَسْتَغْفِرُكَ لِمَا لَا أَعْلَمُ بِهِ، تُبْتُ عَنْهُ وَتَبَرَّأْتُ مِنَ الْكُفْرِ وَالشِّرْكِ وَالْكِذْبِ وَالْغِيبَةِ وَالْبِدْعَةِ وَالنَّمِيمَةِ وَالْفَوَاحِشِ وَالْبُهْتَانِ وَالْمَعَاصِي كُلِّهَا، وَأَسْلَمْتُ وَأَقُولُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ
उच्चारण:
अल्लाहुम्मा इन्नी आऊज़ुबिका मिन अन उश रिका बिका शैअन व अना आ’लमु बिही, व अस्तग़फ़िरुका लिमा ला आ’लमुहू, तुब्तु अन्हु व तबर्रअतु मिनल कुफ़री वश शिकि वल किज़्बि वल ग़ीबति वल बिदअति वन नमीमति वल फ़वाहिषि वल बुहतानि वल मआसी कुल्लिका, व अस्लमतु व अक़ूलु ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह।
हिंदी अर्थ (सरल भाषा में):
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ कि मैं किसी को तेरा साझीदार न बनाऊं। मैं हर तरह के कुफ्र, झूठ, गीबत, बुराई और गुनाह से तौबा करता हूँ और यह मानता हूँ कि अल्लाह एक है और मुहम्मद ﷺ उसके रसूल हैं।
यह कलमा शिर्क और बुराइयों से बचने की दुआ है।
कलमा पढ़ने का महत्व
- ईमान मजबूत होता है
- अल्लाह से संबंध गहरा होता है
- गुनाहों की माफी मिलती है
- दिल को सुकून मिलता है
- जीवन में आध्यात्मिक मजबूती आती है
निष्कर्ष
Kalma का अर्थ है इस्लाम की बुनियादी आस्था को शब्दों में व्यक्त करना।
इन 6 कलमों में इस्लाम का पूरा सार समाहित है —
- एक अल्लाह पर विश्वास
- रसूल की गवाही
- अल्लाह की महानता
- तौबा और सुधार
जो व्यक्ति सच्चे दिल से इन कलमों को पढ़ता और समझता है, उसका ईमान मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
