बाबापुर की रामलीला : तेनालीराम की कहानी
बाबापुर की रामलीला:-विजयनगर में हर साल दशहरे से पहले रामलीला का आयोजन बड़ी धूमधाम से होता था। काशी की प्रसिद्ध
बाबापुर की रामलीला:-विजयनगर में हर साल दशहरे से पहले रामलीला का आयोजन बड़ी धूमधाम से होता था। काशी की प्रसिद्ध
तेनालीराम राजा कृष्णदेव राय के अत्यंत प्रिय और बुद्धिमान मंत्री थे। उनकी समझदारी और राजा के निकट होने के कारण
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में एक गरीब लेकिन मेहनती लकड़हारा रहता था। वह रोज
घने जंगल और ऊँचे पहाड़ों के बीच एक बहुत चालाक सियार रहता था। कई दिनों से उसे खाने को कुछ
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व हरछठ (हलषष्ठी) माताओं के लिए विशेष महत्व रखता
बहुत समय पहले की बात है। दो छोटे-छोटे गाँव थे और उन दोनों गाँवों के बीच एक घना जंगल पड़ता
साधु-संतों का सत्संग अक्सर लोगों का जीवन सुधार देता है, लेकिन पयाग के साथ उल्टा ही हुआ। वह मेहनती और
सिख इतिहास में गुरु और शिष्य के संबंध को अत्यंत पवित्र माना गया है। यह संबंध केवल शिक्षा तक सीमित
आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी बातों में भी फायदा देखने लगते हैं, ऐसे में अगर कोई बिना लालच
जादूगर का घमंड:-एक बार विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक प्रसिद्ध जादूगर आया। वह अपने साथ तरह-तरह